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वाराणसी में गंगा 63.79 मीटर की ओर अग्रसर: तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की बढ़ी धुकधुकी

केंद्रीय जल आयोग के नए आंकड़े: 63.79 मीटर पहुंचा पूर्वानुमान, तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ी

 

 

वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में जारी मूसलाधार बारिश के चलते वाराणसी में गंगा नदी का उफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की 9 अगस्त 2026 की शाम 7:00 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर 63.79 मीटर तक पहुंचने का पूर्वानुमान लगाया गया है (जबकि शाम 4:00 बजे यह 63.78 मीटर दर्ज किया गया था)।

यद्यपि वाराणसी के लिए चेतावनी बिंदु (Warning Level) 70.262 मीटर और खतरा बिंदु (Danger Level) 71.262 मीटर तय है, फिर भी बीते 24 घंटों में करीब तीन फीट की तेजी से बढ़े जलस्तर ने घाटों के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है।

दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर आरती का स्थान बदला, आपस में कटे घाट

गंगा के बढ़ते दबाव के कारण अस्सी घाट के बाद अब विश्वप्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर होने वाली भव्य गंगा आरती का स्थान बदलना पड़ा है। वर्तमान में दोनों घाटों पर पारंपरिक चबूतरे से करीब 10 फीट ऊपर सीढ़ियों पर आरती का आयोजन किया जा रहा है।

जलस्तर बढ़ने से घाटों के बीच का पैदल संपर्क मार्ग भी जलमग्न हो चुका है:

  • तुलसी घाट से पम्पवा घाट जाने वाला संपर्क प्लेटफॉर्म डूब चुका है।

  • दशाश्वमेध घाट से अहिल्याबाई घाट और निकटवर्ती घाटों की ओर जाने वाले रास्ते पानी में समा चुके हैं।

प्रशासन की कड़ाई: बाहरी नावों के ठहराव पर पाबंदी, लाइफ जैकेट अनिवार्य

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए हैं। दशाश्वमेध घाट पर आरती के दौरान बाहरी नावों के लंगर डालने पर रोक लगा दी गई है।

प्रशासन ने नाविकों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं:

  1. बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को नौकायन न कराया जाए।

  2. नाव की निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने पर सख्त मनाही है।

निदेशों का स्वागत करते हुए नाविक शंभु निषाद ने कहा कि सभी नाविक सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

पुरोहितों और नाविकों की बढ़ी चिंताएं

अस्सी घाट के पुजारी बलिराम मिश्र के अनुसार, गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय निवासियों, स्नानार्थियों और दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नियमित धार्मिक कर्मकांड और पूजा-पाठ की व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो रही हैं। यदि जलस्तर में बढ़ोतरी का यही क्रम जारी रहा तो नौका संचालन पूरी तरह बंद हो सकता है, जिससे नाविकों और तीर्थ पुरोहितों के सामने आजीविका का संकट गहरा जाएगा।