पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर केस: चौक पुलिस की ढिलाई पर वाराणसी कोर्ट सख्त, प्रगति रिपोर्ट न देने पर जारी किया कड़ा निर्देश
वाराणसी: चौक थाने में दर्ज मुकदमे में 6 महीने बाद भी चार्जशीट दाखिल न होने पर विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
वाराणसी (भदैनी मिरर): चौक थाने में दर्ज एक चर्चित मामले में आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की अर्जी पर वाराणसी पुलिस द्वारा प्रगति रिपोर्ट (आख्या) न सौंपने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अनुज यादव की दलीलों को सुनते हुए चौक थाना पुलिस को अविलंब जांच की अद्यतन आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 1 अगस्त तय की है।
6 महीने बीतने पर भी चार्जशीट नहीं, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
गौरतलब है कि पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव के माध्यम से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल कर मामले की प्रगति रिपोर्ट तलब करने की मांग की थी। अर्जी में आरोप लगाया गया कि एफआईआर दर्ज हुए 6 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस ने अभी तक जांच को तार्किक या कानूनी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया है।
अमिताभ ठाकुर की ओर से सवाल उठाया गया कि एफआईआर दर्ज होने के महज 10 दिनों के भीतर पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत मांगी थी, लेकिन इसके बाद 8 महीने बीत जाने पर भी न तो जांच पूरी की गई और न ही सक्षम न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया गया। उन्होंने पुलिस की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कोर्ट से मामले की निष्पक्ष प्रगति रिपोर्ट तलब करने की अपील की थी, जिस पर पूर्व की तारीख में कोर्ट ने चौक पुलिस से 24 जुलाई तक आख्या मांगी थी। तय तिथि पर आख्या न आने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए नया निर्देश जारी किया है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला बीते वर्ष का है, जब बड़ी पियरी निवासी हिंदू युवा वाहिनी के नेता एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के मानद सदस्य अम्बरीष सिंह भोला ने 9 दिसंबर को चौक थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन पर आपराधिक मामलों में शामिल होने के झूठे आरोप लगाए गए थे। इसके साथ ही, बहुचर्चित कफ सिरप मामले में भी बिना किसी साक्ष्य के नाम घसीटते हुए भ्रामक खबरें प्रचारित की गईं, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।