वाराणसी में आग का तांडव: पंखा गोदाम में 48 घंटे बाद फिर भड़कीं लपटें
मलबे के नीचे रखे सॉल्वेंट रसायनों से सुलग रही चिंगारी; बिल्डिंग ढहने के खतरे के बीच कूलिंग ऑपरेशन जारी
वाराणसी / भदैनी मिरर:धर्मनगरी वाराणसी के पंखा निर्माण एवं फिनिशिंग गोदाम में लगी भीषण आग 48 घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पूरी तरह शांत होने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार तड़के मलबे के नीचे दबी चिंगारियां सॉल्वेंट रसायनों के संपर्क में आते ही एक बार फिर शोला बनकर भड़क उठीं। आग की ऊंची लपटें दोबारा उठते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने भारी मशक्कत के बाद दोबारा भड़की लपटों पर काबू पाया, लेकिन हादसे के सटीक कारणों का रहस्य अब भी बरकरार है।
सॉल्वेंट रसायन बने मुसीबत का सबब
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोदाम के अंदर पंखों के निर्माण और फिनिशिंग में इस्तेमाल होने वाले ज्वलनशील सॉल्वेंट (रसायन) भारी मात्रा में स्टोर करके रखे गए हैं। मलबे के नीचे दबा यह रसायन जैसे ही हवा के संपर्क में आता है, आग की सुलगती चिंगारियां तुरंत विकराल रूप धारण कर लेती हैं। यही वजह है कि 48 घंटे बाद भी कूलिंग ऑपरेशन पूरा नहीं हो सका है।
झुक गई बीम, बेसमेंट बना 'डेंजर जोन'
लगातार दो दिनों से जारी भीषण तपिश और अत्यधिक तापमान के कारण बहुमंजिला इमारत का ढांचा बुरी तरह कमजोर पड़ गया है। अत्यधिक गर्मी की वजह से बिल्डिंग की मुख्य बीम नीचे की ओर झुक गई है, जिससे किसी भी वक्त पूरी इमारत के ढहने का गंभीर खतरा बना हुआ है।
इमारत के इस खतरनाक ढांचे के चलते दमकलकर्मी बेसमेंट में उतरने का जोखिम नहीं उठा पा रहे हैं। बेसमेंट में प्रवेश न कर पाने के कारण अंदर दबे मलबे और रसायनों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही है, जिससे कूलिंग ऑपरेशन में भारी बाधा आ रही है।
हादसे की वजह अब भी पहेली
अग्निशमन विभाग की गाड़ियां और जवान पूरी मुस्तैदी से मौके पर डटे हुए हैं और पानी की बौछारों से मलबे को ठंडा करने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि जब तक बेसमेंट में प्रवेश कर पूरी तरह से सर्च और कूलिंग ऑपरेशन पूरा नहीं कर लिया जाता, तब तक आग के पूरी तरह बुझने का दावा नहीं किया जा सकता। आग लगने की असली वजह शॉर्ट सर्किट है या कोई बड़ी लापरवाही, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।