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दुर्गा पूजा 2026: वाराणसी में 512 प्रतिमाओं के लिए केवल 20 विसर्जन स्थल; पूजा समितियों ने उठाए सवाल

लक्ष्मीकुंड सूखा तो कई पोखरों में गिर रहा नाले का पानी; बदहाल सड़कें, जाम और बंदरों के आतंक से हलकान आयोजक, आंदोलन की चेतावनी

 

वाराणसी / भदैनी मिरर:धर्मनगरी वाराणसी में शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा को लेकर भव्य पंडालों के सजने का सिलसिला तेज हो गया है, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों के नाम पर धरातल पर सिर्फ अव्यवस्थाएं नजर आ रही हैं। शहर की विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के प्रतिनिधियों ने विसर्जन कुंडों की बदहाली, बदहाल सड़कों, बंदरों के आतंक और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव को लेकर प्रशासन पर कड़े सवाल दागे हैं। आयोजकों का साफ कहना है कि प्रशासन केवल थानेवार बैठकों में निर्देश और नोटिस जारी कर रहा है, जबकि धरातल पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए कोई काम नहीं हो रहा।

एक तालाब पर 26 प्रतिमाओं के विसर्जन की चुनौती

केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति और श्री वाराणसी दुर्गोत्सव समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, जिले भर में 512 से अधिक स्थानों पर दुर्गा पूजा की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन ने विसर्जन के लिए महज 20 स्थल तय किए हैं। इस गणित के हिसाब से औसतन एक तालाब में 26 प्रतिमाओं को विसर्जित करने की भारी चुनौती होगी।

आयोजकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि:

  • लक्ष्मीकुंड व सारंग तालाब: ऐतिहासिक लक्ष्मीकुंड में पानी ही नहीं है, जबकि सारंग तालाब पोखरा बंद कर दिया गया है।

  • गंदगी व दुर्गंध: कई प्रस्तावित विसर्जन स्थलों में नालों और तबेलों का गंदा पानी गिर रहा है, जहाँ मवेशी तैर रहे हैं। ऐसे अस्वच्छ पानी में माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ है।

  • विकल्पों पर निर्माण: शंकुलधारा पोखरा बंद कर दिया गया है और विनायका विसर्जन स्थल पर थीम पार्क बनाया जा रहा है।

सनातनी परंपराओं की अनदेखी पर समितियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विसर्जन कुंडों की सफाई और उचित व्यवस्था समय रहते नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

खराब सड़कें, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं

हथुआ मार्केट, अर्दली बाजार, पांडेयपुर, लहरतारा और जंगमबाड़ी की पूजा समितियों के पदाधिकारियों ने बताया कि पंडालों तक जाने वाली हर दूसरी सड़क गड्ढों में तब्दील है। खजुरी से पांडेयपुर मार्ग पर खोदाई के चलते बांस-बल्ली लगाना तक मुश्किल हो गया है।

इसके अलावा, पूजा समितियों की प्रमुख शिकायतें इस प्रकार हैं:

  1. सुरक्षा एवं मिशन शक्ति नदारद: रात में उमड़ने वाली भीड़ के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'मिशन शक्ति' या पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं रहता। समितियों को अपने निजी खर्च पर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड लगाने पड़ रहे हैं।

  2. रूट डायवर्जन की अनदेखी: कचहरी और अर्दली बाजार जैसे व्यस्त क्षेत्रों में बार-बार निवेदन के बावजूद ट्रैफिक डायवर्जन लागू नहीं किया जा रहा, जिससे श्रद्धालुओं को जाम से जूझना पड़ता है।

  3. बंदरों का आतंक व सफाई का अभाव: बंदर लगातार पंडालों और सजावट को नुकसान पहुंचा रहे हैं। नगर निगम की ओर से न तो पेयजल के टैंकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं और न ही मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन से सुधार की मांग

आयोजकों ने मांग उठाई है कि विसर्जन के लिए सभी कुंडों और तालाबों में तुरंत स्वच्छ पानी भरा जाए, जाल लगवाया जाए और क्रेन की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही विसर्जन मार्गों और प्रमुख चौराहों पर गड्ढामुक्त सड़कें व सुरक्षा बल की मुस्तैद तैनाती सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि आस्था का यह पावन पर्व सुचारू रूप से संपन्न हो सके।