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BHU में छात्रसंघ बहाली की मांग तेज: अनिश्चितकालीन धरने के 7वें दिन छात्रों ने खून से लिखा पत्र, PMO और कुलपति को भेजा

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में करीब तीन दशक से बंद हैं छात्रसंघ चुनाव; छात्र नेता अमन यादव ने रक्त-पत्र लिखकर लोकतांत्रिक अधिकार की उठाई मांग

 

 

 

 

भदैनी मिरर (वाराणसी डेस्क): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में जारी अनिश्चितकालीन धरने के सातवें दिन (2 नवंबर) आंदोलनरत छात्रों ने अपनी मांगों की ओर विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। छात्रों ने माननीय कुलपति और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नाम अपने खून से पत्र (रक्त-पत्र) लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया।

छात्र अमन यादव ने खून से लिखा पत्र

धरने के दौरान छात्र प्रतिनिधि अमन यादव ने अपने रक्त से पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव तत्काल बहाल करने की मांग की। अमन यादव ने कहा कि बीएचयू में करीब तीन दशकों (30 साल) से छात्रसंघ चुनाव न कराया जाना विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर बड़ा सवालिया निशान है।

उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सात दिन बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी छात्रों से वार्ता करने नहीं पहुंचा है। विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाया नहीं जा सकता और प्रशासन को जल्द से जल्द छात्र हित में ठोस निर्णय लेना होगा।

"न थकेंगे, न झुकेंगे, संघर्ष जारी रहेगा"

आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता शिवांश सिंह ने कहा कि पिछले सात दिनों से जारी यह अनिश्चितकालीन धरना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि छात्रसंघ बहाली की मांग अब पूरे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की एकजुट आवाज बन चुकी है।

उन्होंने बताया कि इस रक्त-पत्र के माध्यम से छात्रों ने अपनी पीड़ा और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को देश के प्रधानमंत्री कार्यालय और विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की है। छात्रों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि "न थकेंगे, न झुकेंगे, जब तक छात्रसंघ की बहाली नहीं हो जाती, यह संघर्ष इसी तरह एकजुटता के साथ जारी रहेगा।"

तीन दशक से बंद है छात्र प्रतिनिधित्व

गौरतलब है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव स्थगित हैं, जिसके कारण छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और कैंपस की समस्याओं को उठाने के लिए आधिकारिक मंच से वंचित हैं। अब आंदोलनरत छात्रों ने पूरे विश्वविद्यालय समुदाय से इस संघर्ष में एकजुट रहने की अपील की है।