काशी में स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा का दर्शन कल से: बंटेगा अद्भुत खजाना, सीपी और डीएम ने मंदिर सुरक्षा का लिया जायजा
धनतेरस पर सुबह 5 बजे खुलेंगे कपाट; 5 दिनों तक श्रद्धालु कर सकेंगे स्वर्णमयी प्रतिमा और रजत महादेव के दर्शन, प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के किए पुख्ता इंतजाम
भदैनी मिरर (वाराणसी)। दीपावली और धनतेरस के पावन पर्व को लेकर धर्मनगरी काशी में भक्ति और उत्साह का माहौल चरम पर है। धनतेरस के पावन अवसर पर सिद्धपीठ अन्नपूर्णा मठ मंदिर में जगतजननी मां अन्नपूर्णा के अलौकिक 'स्वर्णमयी रूप' के दर्शन और भक्तों के बीच पारंपरिक खजाने का वितरण किया जाएगा। मां अन्नपूर्णा के इस दुर्लभ दर्शन पाने के लिए श्रद्धालु गुरुवार शाम से ही कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे हैं।
पुलिस कमिश्नर और डीएम ने लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा
पर्व पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए गुरुवार को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी ने बाबा काशी विश्वनाथ धाम और मां अन्नपूर्णा मंदिर का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के सुचारु आवागमन, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण की तैयारियों को बारीकी से परखा। सीपी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम रखे जाएं।
सुबह 5 बजे से खुलेंगे कपाट, 5 दिनों तक होंगे दर्शन
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि इस बार धनतेरस पर बेहद शुभ योग का निर्माण हो रहा है, जो देश में समृद्धि और खुशहाली लाएगा। मंदिर के कपाट निर्धारित समय से एक घंटे पहले यानी सुबह 5 बजे आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। मंगल बेला में भोर 3 बजे से पौने 5 बजे तक माता का सविधि पूजन-अर्चन और आरती होगी। इसके बाद माता के खजाने व 21 किलो रजत खजाने की पूजा की जाएगी।
श्रद्धालु लगातार 5 दिनों तक स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा, भू-देवी, मां लक्ष्मी और रजत महादेव के भव्य दर्शन कर सकेंगे। 6 नवंबर (धनतेरस) से खजाने का वितरण शुरू होगा जो मंदिर बंद होने तक चलेगा। इसके बाद 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव पर लड्डुओं की अलौकिक झांकी सजाई जाएगी और रात्रि 11:30 बजे महाआरती के बाद स्वर्णमयी प्रतिमा के कपाट पूरे एक वर्ष के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
कंट्रोल रूम और मेडिकल टीम तैनात
मंदिर के प्रबंधक काशी मिश्रा के अनुसार, सुरक्षा के दृष्टिकोण से मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी गई है और कंट्रोल रूम के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मंदिर परिसर में ही एक मेडिकल टीम और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी की गई है।