IMS-BHU में करोड़ों का घोटाला? जेम पोर्टल और CSR फंड से खरीद पर बैठी विजिलेंस जांच, अधिकारियों में हड़कंप
शिक्षा मंत्रालय की टीम ने BHU के एलडी गेस्ट हाउस में की मैराथन पूछताछ; ₹66 लाख की मशीन ₹3.64 करोड़ में खरीदने का आरोप।
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS) में सीएसआर (CSR) फंड और जेम (GeM) पोर्टल के जरिए हुई मशीनों की खरीद में बड़े घोटाले की बू आ रही है। इस मामले में दर्ज कराई गई गंभीर शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्रालय की विजिलेंस टीम ने वाराणसी में दस्तक दे दी है। दो सदस्यीय विजिलेंस टीम ने गुरुवार को बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में सुबह 10 बजे से लेकर देर रात तक डेरा डाले रखा और संबंधित अधिकारियों से कड़ाई से पूछताछ की।
इस हाई-प्रोफाइल जांच से बीएचयू प्रशासनिक हल्के और चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। टीम ने खरीद से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों और फाइलों को अपने कब्जे में लेकर उनका बारीकी से परीक्षण किया है।
करोड़ों की हेराफेरी का आरोप: ₹66 लाख की मशीन ₹3.64 करोड़ में खरीदी!
शिकायत के मुताबिक, आईएमएस-बीएचयू के सर्जरी विभाग में सर्जिकल कार्यों के लिए दिल्ली की एक कंपनी के माध्यम से 6 मशीनें खरीदी गईं। इस खरीद में भारी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं:
-
बाजार मूल्य: यही विशिष्ट मशीन शेर-ए-कश्मीर मेडिकल कॉलेज में 60 लाख रुपये और एम्स (AIIMS) में 66 लाख रुपये में खरीदी गई थी।
-
BHU में भुगतान: आरोप है कि आईएमएस-बीएचयू ने इसी एक मशीन के लिए 3.64 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
-
कुल घाटा: इस दर से सभी 6 मशीनें कुल 21.89 करोड़ रुपये में खरीदी गईं, जो वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक है।
निदेशक और विभागाध्यक्षों से अलग-अलग पूछताछ
विजिलेंस टीम ने एलडी गेस्ट हाउस में आईएमएस के निदेशक, एमएस (Medical Superintendent), विभिन्न प्रोफेसरों, विभागाध्यक्षों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े बाबू व अधिकारियों को अलग-अलग बुलाकर पूछताछ की। टीम ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच की:
-
खरीद की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति (Technical & Administrative Approval)
-
तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) की प्रक्रिया
-
जेम (GeM) पोर्टल के नियमों का पालन
-
आपूर्ति और भुगतान (Supply & Payment) से जुड़ी फाइलें
विजिलेंस अधिकारियों ने प्रक्रिया के हर एक चरण (Step) की लिखित जानकारी ली है और कई अधिकारियों से अतिरिक्त दस्तावेज भी तलब किए हैं।
कार्डियोलॉजी विभाग की लौटाई गई मशीन पर भी गहराया सस्पेंस
जांच के दौरान कार्डियोलॉजी विभाग का एक और गंभीर मामला सामने आया। विभाग ने कुछ समय पहले एक मशीन की गुणवत्ता और उसकी उपयोगिता पर गंभीर आपत्ति जताते हुए उसे लेने से मना कर दिया था और फाइल निदेशक कार्यालय को वापस भेज दी थी।
विजिलेंस टीम ने इस मामले को भी जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों ने कार्डियोलॉजी विभाग के आंतरिक पत्राचार, निरीक्षण रिपोर्ट और मशीन को रिजेक्ट (Reject) करने के पुख्ता कारणों का पूरा ब्योरा मांगा है।
शिक्षा मंत्रालय तय करेगा आगे की कार्रवाई
विजिलेंस टीम की यह कार्रवाई सीधे शिक्षा मंत्रालय को भेजी गई उन शिकायतों के आधार पर हो रही है, जिनमें वित्तीय नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का दावा किया गया था। टीम ने कुछ और जरूरी दस्तावेज जुटाने के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत अंतिम रिपोर्ट सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को सौंपी जाएगी, जिसके बाद दोषियों पर कड़ी दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई तय होगी।