दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक और आइसा नेताओं के समर्थन में उतरे कम्युनिस्ट पार्टी माले के कार्यकर्ता
NEET पेपर लीक के खिलाफ वाराणसी में भाकपा माले का प्रदर्शन: राष्ट्रपति को भेजा पत्र; NTA को रद्द करने और न्यायिक जांच की मांग
वाराणसी/दिल्ली। देश में नीट (NEET) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामले और परीक्षा प्रणाली में कथित भ्रष्टाचार को लेकर छात्रों और सामाजिक संगठनों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 12 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन और 5 दिनों से जारी भूख हड़ताल के समर्थन में अब कम्युनिस्ट पार्टी माले (भाकपा माले) भी खुलकर मैदान में उतर आई है।
कम्युनिस्ट पार्टी माले के राज्य कमेटी सदस्य मिठाई लाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति महोदया के नाम संबोधित एक पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर इस दुर्व्यवस्था पर तत्काल कड़े कदम उठाने की मांग की।
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और छात्र नेता आमरण अनशन पर
राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में अवगत कराया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले पांच दिनों से देश के जाने-माने पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा, जेएनयू छात्रसंघ के सह-सचिव दानिश अली, उत्तर प्रदेश आइसा के अध्यक्ष मनीष कुमार सहित कई छात्र नेता आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठे हैं।
माले नेता मिठाई लाल ने कहा, "पूरे देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के कारण नौजवानों और छात्रों का भविष्य अंधकार में डूब गया है। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण कई होनहार छात्र आत्महत्या करने को मजबूर हो चुके हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।"
"सरकार के वादे सिर्फ कागजी, जमीन पर हालात बदहाल"
भाकपा माले के नेता मिठाई लाल ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार बार-बार कड़े कानून बनाने और एआई (AI) कैमरों से निगरानी की बात करती है, लेकिन ये नियम सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि कानून बने, लेकिन वह कड़ाई से लागू भी होना चाहिए। लगातार हो रहे पेपर लीक से छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर से भरोसा उठ गया है। इसीलिए बिना किसी पूर्व तैयारी के भी हम इस जनहित के मुद्दे पर प्रतीकात्मक रूप से सड़क पर उतरे हैं और यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।"
आंदोलनकारियों की 5 मुख्य मांगें:
इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सुर में सुर मिलाते हुए भाकपा माले ने राष्ट्रपति से निम्नलिखित मांगों को पूरा करने का आग्रह किया है:
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा लिया जाए।
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NTA को भंग करना: बार-बार विवादों में घिरने वाली परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तुरंत रद्द किया जाए।
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उच्च स्तरीय न्यायिक जांच: उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर, यूपीएसआई (UPSI) और लेखपाल भर्ती में हुई अपारदर्शिता व कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
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मुआवजे की मांग: पेपर लीक और परीक्षा दुर्व्यवस्था के कारण असमय मौत (आत्महत्या) का शिकार हुए छात्रों के पीड़ित परिवारों को समुचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
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जंतर-मंतर पर बुनियादी सुविधाएं: दिल्ली के धरना स्थल पर प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए साफ पानी और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और प्रशासन द्वारा किए जा रहे किसी भी तरह के उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर भूमिहीनों और गरीबों की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों को रोकने और काश्तकारों को उनकी जमीन पर खेती करने का अधिकार दिलाने की मांग भी प्रशासन से की गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक विचार नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।