{"vars":{"id": "125128:4947"}}

सीओ सिराथू सत्येंद्र तिवारी की गिरफ्तारी का आदेश, वाराणसी कोर्ट ने वेतन भी रोका; जानें क्या है पूरा मामला

एससी/एसटी एक्ट मामले में गवाही न देने पर गैर-जमानती वारंट, 10 सितंबर 2026 तक अरेस्ट कर कोर्ट में पेश करने का निर्देश

 

वाराणसी / कौशांबी (भदैनी मिरर)

हाल ही में कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद पीड़ित परिजनों के गले लगकर रोने वाले सिराथू सर्किल के सीओ सत्येंद्र तिवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वाराणसी के विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) ने एक पुराने आपराधिक मामले में लगातार गवाही से गायब रहने पर उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सीओ सत्येंद्र तिवारी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 तक कोर्ट में पेश करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही चीफ ट्रेजरी ऑफिसर को निर्देश देकर उनके वेतन पर भी रोक लगा दी गई है।


2018 के मामले में लंबित है गवाही


यह मामला सत्र परीक्षण संख्या 401/2018 (राज्य बनाम तौफीक आलम अंसारी) से जुड़ा है। उस समय सत्येंद्र प्रसाद तिवारी मामले के विवेचक (जांच अधिकारी) थे। कोर्ट में विवेचक और चिकित्सक की गवाही दर्ज होनी थी। विशेष न्यायाधीश सुधाकर राय की अदालत ने साक्ष्य दर्ज कराने के लिए उन्हें कई बार समन भेजा, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए।

कोर्ट के बार-बार दिए आदेशों की अनदेखी


अदालत के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को सीओ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से तलब किया गया था, लेकिन उन्होंने तिरंगा यात्रा की व्यस्तता का हवाला देकर उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद 24 अगस्त 2026 को वीसी से साक्ष्य देने का मौका दिया गया, फिर भी वे अनुपस्थित रहे। कोर्ट ने अंतिम अवसर देते हुए 1 सितंबर 2026 की तिथि तय की, लेकिन सीओ फिर भी उपस्थित नहीं हुए।


मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभिषेक कुमार दुबे ने गवाह की लगातार गैरहाजिरी पर सवाल उठाए। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षी जानबूझकर अदालत में पेश होने से बच रहे हैं।
इसके बाद कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को सीओ सत्येंद्र प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को हर हाल में अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही, अग्रिम आदेश तक उनका वेतन रोकने और आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।