BHU के डॉक्टरों का बड़ा कमाल: पालतू गाय के हमले में घायल युवक के चेहरे पर लगे 80 टांके, 'ऑर्बिटल नेविगेशन' से बची आंख की रोशनी
नेत्र विज्ञान और ओरल मैक्सिलोफेशियल विभाग की टीम ने 4 घंटे चली जटिल सर्जरी में लगाए 10 टाइटेनियम प्लेट; बलिया के बेल्थरा निवासी मरीज अब खतरे से बाहर।
वाराणसी (भदैनी मिरर): काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS) के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में डॉक्टरों की टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और नया कीर्तिमान स्थापित किया है। डॉक्टरों ने आधुनिक 'ऑर्बिटल नेविगेशन सिस्टम' (Orbital Navigation System) की मदद से एक बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
बलिया जिले के बेल्थरा निवासी 46 वर्षीय जीत बहादुर को पालतू गाय के हमले में चेहरे, आंख की हड्डी और जबड़े में आई गंभीर चोटों के बाद बीएचयू में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने 4 घंटे चले मैराथन ऑपरेशन में चेहरे पर 80 टांके लगाए और 10 टाइटेनियम मिनी प्लेट्स फिक्स कर मरीज को नया जीवन दिया।
पालतू गाय ने उठाकर पटका: जबड़ा टूटा, आंख अंदर धंसी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेल्थरा (बलिया) के जीत बहादुर अपने घर में पालतू गाय को चारा खिला रहे थे। इसी दौरान गाय ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उठाकर पटक दिया।
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गंभीर चोटें: हादसे में उनकी आंख के आसपास की हड्डियां (ऑर्बिटल फ्लोर) और बाईं ओर का जबड़ा (मैंडिबल) बुरी तरह टूट गया था।
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क्रिटिकल स्थिति: आंख अंदर की ओर धंस गई थी और मरीज का मुंह खुलना बंद हो गया था। रेडियोलॉजिकल जांच में पेरिऑर्बिटल फैट का मैक्सिलरी साइनस में धंसना पाया गया, जिससे दृष्टि जाने का खतरा मंडरा रहा था।
आधुनिक नेविगेशन तकनीक से 4 घंटे चली जटिल सर्जरी
क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर आर.पी. मौर्य के नेतृत्व में नेत्र रोग विभाग और ओरल मैक्सिलोफेशियल विभाग की संयुक्त टीम ने शनिवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक इस बहुविषयक (Multidisciplinary) सर्जरी को अंजाम दिया।
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ऑर्बिटल नेविगेशन सिस्टम: आईएमएस बीएचयू में पहली बार इस आधुनिक इमेज-गाइडेड मशीन का प्रयोग किया गया।
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टाइटेनियम मिनी प्लेट्स व मेश: टूटी हड्डियों और जबड़े को फिक्स करने के लिए 10 टाइटेनियम मिनी प्लेट्स और 1 टाइटेनियम मेश का प्रयोग किया गया।
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रंग लाई डॉक्टरों की मेहनत: चेहरे की शारीरिक संरचना का सटीक पुनर्निर्माण (Reconstruction) किया गया और 80 टांके लगाए गए।
"सुरक्षित रहेगी आंख की रोशनी और चेहरा"
प्रो. आर.पी. मौर्य ने बताया कि इस जटिल सर्जरी के सफल होने से अब मरीज की आंखों की रोशनी पूरी तरह सुरक्षित है और वह सामान्य रूप से भोजन भी कर सकेगा। मरीज को फिलहाल कुछ दिनों के लिए डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
उन्होंने बताया कि कुलपति और आईएमएस निदेशक के सहयोग से विभाग को यह अत्याधुनिक ऑर्बिटल नेविगेशन मशीन मिली है। इस तकनीक की सुविधा शुरू होने से अब पूर्वांचल, बिहार और झारखंड के उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें चेहरे और आंख की गंभीर चोटों के इलाज के लिए बड़े महानगरों में जाना पड़ता था।