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BHU के प्रो. ओमशंकर का बड़ा दावा: “100 साल में पहली Angioplasty मैंने की, सेवा ही मेरा लक्ष्य”

कार्डियोलॉजिस्ट ओमशंकर ने प्रेस नोट में बताए संघर्ष, षड्यंत्र और उपलब्धियों के किस्से; BHU में इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी की नींव रखने का किया दावा

 

वाराणसी। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के IMS-SSH में तैनात कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. ओमशंकर ने 18 मार्च 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में अपने करियर, संघर्ष और संस्थान में योगदान को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी पैसा कमाना नहीं बल्कि समाज सेवा रहा है।

“भाई की मौत ने बनाया डॉक्टर”

प्रो. ओमशंकर ने बताया कि उनके छोटे भाई की इलाज के अभाव में मौत हो गई थी, जिसने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि BHU आने से पहले वह देश के बड़े निजी संस्थानों में कार्यरत थे, लेकिन समाज सेवा के उद्देश्य से उन्होंने BHU को चुना।

BHU में आने पर ऐसी थी स्थिति

उन्होंने बताया कि जब वह BHU के कार्डियोलॉजी विभाग में आए, तब—

  • सप्ताह में केवल 3 दिन OPD होती थी

  • हर OPD में 25-30 मरीज आते थे

  • विभाग में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं नहीं थीं

  • संस्थान की छवि नकारात्मक थी

ऐसे हालात में उन्होंने कार्डियक इंटरवेंशन प्रोग्राम शुरू करने का संकल्प लिया।

“मुझे OPD से दूर रखने की साजिश हुई”

प्रेस नोट में उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन विभागाध्यक्ष और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने उन्हें OPD से दूर रखने की कोशिश की। हालांकि, तत्कालीन IMS निदेशक के हस्तक्षेप के बाद उन्हें काम करने की अनुमति मिली।

 पहली Angiography और ‘साजिश’ का आरोप

प्रो. ओमशंकर ने दावा किया कि BHU में पहली एंजियोग्राफी उन्होंने की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि एक मरीज के केस में जानलेवा साजिश की गई, लेकिन उन्होंने 8 घंटे तक प्रयास कर मरीज की जान बचाई।

पहली Angioplasty और ऐतिहासिक कदम

उन्होंने बताया कि 2011 में उन्होंने BHU में पहली एंजियोप्लास्टी की, जो संस्थान के 100 साल के इतिहास में पहली थी।
इस कदम को लेकर उस समय मीडिया में भी प्रमुखता से खबरें प्रकाशित हुईं और बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें अनुमति दी।

AIIMS जैसी सुविधा लाने का दावा

प्रो. ओमशंकर ने दावा किया कि उन्होंने BHU में AIIMS स्तर की सुविधाएं लाने की पहल की। इसके लिए 2014 में उन्होंने आंदोलन किया, जिसके चलते उन्हें निलंबन और अनशन का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के बाद—

  • देश में नए AIIMS स्थापित हुए

  • वेलनेस क्लीनिक और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिली

  • आयुष्मान भारत योजना लागू हुई

  • BHU को भी हजारों करोड़ का अनुदान मिला

 “सेवा ही मेरा लक्ष्य”

प्रो. ओमशंकर ने अपने प्रेस नोट में कहा कि उनका पूरा जीवन गरीब और वंचित मरीजों की सेवा के लिए समर्पित है और उन्होंने हमेशा मरीजों को प्राथमिकता दी है।

 “अनुदान के बाद बढ़ा भ्रष्टाचार” — गंभीर आरोप

प्रो. ओमशंकर ने अपने प्रेस नोट में आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर अनुदान मिलने के बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) और सर सुंदरलाल अस्पताल (SSH) में भ्रष्टाचार बढ़ा है।

उन्होंने दावा किया कि—

  • कायाकल्प योजना के नाम पर पहले से ठीक इंफ्रास्ट्रक्चर को तोड़कर दोबारा बनाया गया, जिससे धन की बर्बादी हुई

  • मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (MS) और रजिस्ट्रार को नियमों के विपरीत 4 साल से अधिक समय तक पद पर बनाए रखा गया

  • जांच समितियों ने दोषी पाया, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई

  • उच्च अधिकारियों के आदेश के बावजूद कार्डियोलॉजी विभाग को बेड आवंटित नहीं किए गए

 “अस्पताल का निजीकरण और मरीजों पर बोझ”

प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि—

  • अस्पताल की संपत्तियों और मुनाफे वाली इकाइयों का बिना अधिकार निजीकरण किया गया

  • भारी अनुदान के बावजूद मरीजों को मुफ्त दवा और भोजन नहीं मिल रहा

  • OPD पर्ची और जांच शुल्क में मनमानी बढ़ोतरी की गई, जिससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा

 “मेरे खिलाफ कार्रवाई प्रतिशोधपूर्ण”

प्रो. ओमशंकर का आरोप है कि जब उन्होंने इन मुद्दों को उठाया तो उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।

उन्होंने कहा—

  • Whistle Blower Protection Act का उल्लंघन करते हुए उन्हें प्रताड़ित किया गया

  • ऐसे नियमों के तहत कार्रवाई की गई जो BHU में लागू ही नहीं थे

  • पहली जांच में निर्दोष पाए जाने के बावजूद लगातार नई जांच और नोटिस दिए गए

उनके मुताबिक, यह कार्रवाई सुधार के लिए नहीं बल्कि “भ्रष्टाचार उजागर करने की सजा” है।

 प्रो. ओमशंकर की प्रमुख मांगें

प्रेस नोट में उन्होंने प्रशासन के सामने कई मांगें भी रखीं—

  • उनके खिलाफ सभी कथित गैरकानूनी कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए

  • MS और रजिस्ट्रार के खिलाफ स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो

  • कार्डियोलॉजी विभाग को तुरंत बेड आवंटित किए जाएं

  • BHU संपत्तियों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए

  • मरीजों को मुफ्त दवा और भोजन की सुविधा बहाल हो

  • OPD और जांच शुल्क में की गई बढ़ोतरी वापस ली जाए

“गरीब मरीजों के लिए लड़ाई जारी रहेगी”

प्रेस विज्ञप्ति के अंत में प्रो. ओमशंकर ने भावुक अपील करते हुए कहा कि वह गरीब मरीजों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि जब तक किसी भी व्यक्ति की मौत सिर्फ पैसे की कमी से होती रहेगी, तब तक वह चुप नहीं बैठेंगे और मरीजों के हित में आवाज उठाते रहेंगे।

नोट

यह खबर प्रो. ओमशंकर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार उनके निजी दावे हैं।