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BHU का बयान: प्रो. ओमशंकर के खिलाफ जांच जारी, हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज बनाए गए जांच अधिकारी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन का स्पष्टीकरण, कहा– जांच में सहयोग करें प्रो. ओमशंकर; 2014-15 में निलंबन और कार्रवाई का भी किया जिक्र

 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओमशंकर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को जारी वक्तव्य में कहा गया कि प्रो. ओमशंकर के खिलाफ अवज्ञा (Insubordination) और विश्वविद्यालय के खिलाफ आधारहीन बयानबाजी के आरोपों को लेकर जांच चल रही है। इस जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

7 मार्च को जारी हुआ जांच अधिकारी नियुक्ति का आदेश

BHU के जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार 7 मार्च 2026 को आदेश जारी कर सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।

विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि प्रो. ओमशंकर के खिलाफ पहले से चल रही एक अन्य जांच समिति की जिम्मेदारी भी अब उसी जांच अधिकारी को दी गई है। पहले यह जांच विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ आचार्य द्वारा की जा रही थी, लेकिन उनके प्रतिनियुक्ति पर जाने के कारण नए जांच अधिकारी की नियुक्ति की गई।

जांच में सहयोग करने की अपील

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि प्रो. ओमशंकर से अपेक्षा की जाती है कि वे जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें और जांच में पूरा सहयोग करें।

2014-15 में निलंबन का भी जिक्र

अपने बयान में विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि प्रो. ओमशंकर के आचरण, नियम विरुद्ध गतिविधियों और विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के चलते उन्हें 5 मार्च 2014 से 26 अगस्त 2015 तक निलंबित किया गया था।

विश्वविद्यालय के अनुसार उस समय गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल 2015 में उन्हें दंडित भी किया गया था।

निलंबन वापसी के लिए लिखा था पत्र

बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि 6 जून 2015 को प्रो. ओमशंकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर निलंबन वापस लेने का अनुरोध किया था।

उस पत्र में उन्होंने अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करने का आश्वासन दिया था। विश्वविद्यालय ने कहा कि इस आश्वासन के आलोक में उनसे बेहतर आचरण की अपेक्षा की जाती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए थे गंभीर आरोप

इससे पहले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रो. ओमशंकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि विश्वविद्यालय में केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम (CCS/CCA) कभी विधिवत लागू नहीं हुए, फिर भी पिछले करीब 20 वर्षों में 500 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर इस्तीफा देकर माफी मांगने का अल्टीमेटम भी दिया था और ऐसा नहीं होने पर आपराधिक मामला दर्ज कराने की बात कही थी।

हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने बयान में कहा है कि प्रो. ओमशंकर के आरोपों के संदर्भ में जांच पहले से चल रही है और उन्हें जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए।