BHU News: "मौन है, परंतु आवाज़ बुलंद है" — अभाविप का अनिश्चितकालीन आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, चीफ प्रॉक्टर की बर्खास्तगी की मांग
चीफ प्रॉक्टर की बर्खास्तगी और सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने को लेकर ABVP का अनोखा प्रदर्शन; राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह भी रहे मौजूद, भदैनी मिरर की विशेष रिपोर्ट।
वाराणसी / डिजिटल डेस्क (भदैनी मिरर): काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रहितों की रक्षा, परिसर की गरिमा और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) BHU इकाई का अनिश्चितकालीन आंदोलन दूसरे दिन भी पूरी एकजुटता के साथ जारी रहा। आंदोलन के दूसरे दिन कार्यकर्ताओं ने अत्यंत अनुशासित और अनोखे अंदाज में “मौन है, परंतु आवाज़ बुलंद है” का संदेश देते हुए मौन प्रदर्शन दर्ज कराया।
धरना स्थल पर अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और छात्रों की मांगों का समर्थन किया।
प्रमुख मांगें: चीफ प्रॉक्टर की बर्खास्तगी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार
अभाविप कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जब तक उनकी प्राथमिक मांगों पर लिखित और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
अभाविप की मुख्य मांगें:
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चीफ प्रॉक्टर की तत्काल बर्खास्तगी और प्रोक्टोरियल बोर्ड की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार।
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छात्रों पर पूर्व में की गई दंडात्मक और एकपक्षीय कार्रवाइयों की निष्पक्ष समीक्षा।
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BHU परिसर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाना।
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प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की गारंटी।
नेतृत्व का बयान: "संवाद और समाधान की दिशा में कदम उठाए प्रशासन"
इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने मौन प्रदर्शन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"यह मौन प्रदर्शन हमारे संकल्प की दृढ़ता को दर्शाता है। बीएचयू छात्रों के लिए शिक्षा और संवाद का केंद्र है। छात्रहित से जुड़े विषयों पर प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ संवाद करते हुए समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। जब तक हमारी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, यह अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।"
वहीं, इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा:
"अभाविप का यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरोध तक सीमित नहीं है। हमारा उद्देश्य विश्वविद्यालय में छात्रहित, सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। आज का मौन प्रदर्शन विश्वविद्यालय प्रशासन तक अपनी बात शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाने का प्रयास है।"
प्रशासनिक रवैये से छात्रों में असंतोष
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने साफ कर दिया है कि मौन रहकर भी वे अपनी चिंताओं को पूरी मजबूती के साथ केंद्रीय कार्यालय और प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अभी तक कोई सकारात्मक वार्ता का दौर शुरू न किए जाने से छात्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। फिलहाल धरना स्थल पर शांतिपूर्ण माहौल में आंदोलन जारी है।