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BHU News: पद्मश्री डॉ. टी.के. लहरी से अभद्रता मामला, ABVP ने एमएस को सौंपा ज्ञापन

सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू में हुई कथित मारपीट घटना पर भड़का एबीवीपी; आरोपित शिक्षक को जांच पूरी होने तक दायित्वों से हटाने की मांग

 

भदैनी मिरर (एजुकेशन/सिटी डेस्क): काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू (सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक) में भर्ती 85 वर्षीय एमेरिटस प्रोफेसर एवं पद्मश्री डॉ. टी.के. लहरी के साथ हुई कथित मारपीट और अभद्रता का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील प्रकरण को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), बीएचयू इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (MS) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

अभाविप ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडेय पर लगे आरोपों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

CCTV फुटेज जांच में शामिल करने और सुरक्षा बढ़ाने की मांग

अभाविप प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से अस्पताल प्रशासन के समक्ष मुख्य रूप से चार प्रमुख मांगें रखीं:

  • उच्च स्तरीय समिति और सीसीटीवी जांच: पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए और आईसीयू में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज को जांच का मुख्य आधार बनाया जाए।

  • आरोपित शिक्षक को हटाने की मांग: जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोपित शिक्षक को संबंधित विभाग और प्रशासनिक दायित्वों से दूर रखा जाए।

  • सुरक्षा एवं चिकित्सकीय देखभाल: पद्मश्री डॉ. टी.के. लहरी को अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा और उच्च स्तरीय मेडिकल केयर दी जाए।

'महामना की तपोभूमि पर ऐसा दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं' — ABVP

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह ने कहा कि पद्मश्री डॉ. टी.के. लहरी का पूरा जीवन बीएचयू, चिकित्सा जगत और मानवता की सेवा में बीता है। इतने वरिष्ठ और सम्मानित चिकित्सक के साथ दुर्व्यवहार का मामला अत्यंत गंभीर है और विश्वविद्यालय प्रशासन को बिना किसी पूर्वाग्रह के निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

वहीं, अभाविप बीएचयू इकाई के अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि महामना की तपोभूमि पर किसी भी वरिष्ठ शिक्षक, डॉक्टर या मरीज के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अभाविप ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय और अस्पताल प्रशासन द्वारा मामले में शीघ्र निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संगठन व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।