{"vars":{"id": "125128:4947"}}

BHU: नियमावली के बाद भी हॉस्टल से वंचित दिव्यांग छात्र, सेंट्रल ऑफिस पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

2014 के नियमों की अनदेखी का आरोप; खाली कमरों के लिए गेस्ट चार्ज वसूलने और आवंटन न करने पर छात्रों का फूटा गुस्सा

 

वाराणसी / भदैनी मिरर: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में दिव्यांग और दृष्टिबाधित छात्रों के अधिकारों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। वर्ष 2014 की स्पष्ट नियमावली होने के बावजूद, जिसमें दिव्यांग छात्रों के लिए हॉस्टल आवंटन अनिवार्य किया गया है, पिछले 4-5 वर्षों से छात्र एक-एक कमरे के लिए भटकने को मजबूर हैं। इस प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय के सेंट्रल ऑफिस (केंद्रीय कार्यालय) पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

नियम बने, लेकिन अमल नहीं!

धरना दे रहे छात्रों का आरोप है कि बीएचयू प्रशासन अपनी ही बनाई 2014 की नियमावली का पालन करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। हॉस्टल में कमरे खाली होने के बावजूद दिव्यांग विद्यार्थियों को आधिकारिक आवंटन पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। इसके उलट, उनसे खाली कमरों के एवज में भारी-भरकम 'गेस्ट चार्ज' (Guest Charge) वसूलने का दबाव बनाया जा रहा है, जो आर्थिक और मानसिक रूप से छात्रों का उत्पीड़न है।

छात्रों की तीन प्रमुख मांगें:

केंद्रीय कार्यालय के बाहर विरोध दर्ज करा रहे दृष्टिबाधित और दिव्यांग छात्रों ने प्रशासन के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  • नियमावली का लिखित पालन: 2014 के हॉस्टल आवंटन नियमों को बिना किसी टालमटोल के पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए।

  • तत्काल कमरे का आवंटन: अब तक वंचित रहे सभी पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को तुरंत हॉस्टल रूम अलॉट किए जाएं।

  • गेस्ट चार्ज की वापसी: अवैध और अनुचित रूप से वसूले गए गेस्ट चार्ज की राशि छात्रों को तुरंत वापस की जाए।

छात्र बोले- हक मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन के आश्वासन से तंग आ चुके हैं। जब तक उनकी मांगों पर लिखित रूप से त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तब तक सेंट्रल ऑफिस पर उनका यह शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा। समाचार लिखे जाने तक बीएचयू प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिनिधि ने छात्रों से मुलाकात कर वार्ता की पहल नहीं की थी।

क्या आप इस रिपोर्ट में बीएचयू छात्र अधिष्ठाता (DSW) या विश्वविद्यालय प्रवक्ता का कोई आधिकारिक पक्ष जोड़ना चाहते हैं?