“एक सप्ताह में कुलपति इस्तीफा देकर माफी मांगे नहीं तो दर्ज कराऊंगा आपराधिक मुकदमा” - प्रोफेसर ओमशंकर
BHU में CCA नियम लागू नहीं, फिर 20 साल में 500 कर्मचारियों पर कार्रवाई का आरोप, कहा- RTI से हुआ यह खुलासा
वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम (CCS/CCA) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। BHU अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. ओमशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले दो दशकों से एक ऐसे कानून के आधार पर शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की, जिसे विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने कभी लागू ही नहीं किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विश्वविद्यालय के सुरक्षाधिकारी भी वहां पहुंचे और कार्यक्रम को रुकवाने की कोशिश की, लेकिन प्रो. ओमशंकर ने अपने आरोपों को विस्तार से रखते हुए प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया।
RTI से सामने आया बड़ा दावा
प्रो. ओमशंकर का कहना है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि BHU की कार्यकारी परिषद ने कभी भी CCS आचरण नियम 1964 या CCS (CCA) नियम 1965 को विश्वविद्यालय में लागू करने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया।
उन्होंने कहा कि BHU अधिनियम 1915 के अनुसार विश्वविद्यालय में किसी भी नियम या सेवा शर्त को लागू करने का अधिकार केवल कार्यकारी परिषद के पास है। बिना परिषद की मंजूरी के कोई भी नियम विश्वविद्यालय में लागू नहीं किया जा सकता।
20 वर्षों में 500 से अधिक लोगों पर कार्रवाई का आरोप
प्रो. ओमशंकर के अनुसार, जिस नियम को विश्वविद्यालय में विधिवत लागू ही नहीं किया गया, उसी के आधार पर पिछले 20 वर्षों में 500 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन और सेवा से निष्कासन जैसे कदम उठाए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन नियमों का उपयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने और प्रशासनिक विरोध को खत्म करने के लिए हथियार की तरह किया गया।
2007 के पत्र को बताया विवाद की जड़
प्रो. ओमशंकर ने कहा कि इस पूरे विवाद की शुरुआत 13 जुलाई 2007 को तत्कालीन रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक पत्र से हुई। उनका आरोप है कि उस पत्र में UGC के वेतन संशोधन से जुड़े निर्देशों को इस तरह प्रस्तुत किया गया मानो CCS आचरण नियम विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों पर लागू हो गए हों।
उनके अनुसार, यह पत्र कार्यकारी परिषद की मंजूरी के बिना जारी किया गया था, इसलिए यह कानूनी रूप से अमान्य है।
अदालतों के फैसलों का हवाला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रो. ओमशंकर ने कई न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अदालतों ने भी यह स्पष्ट किया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षकों पर CCS (CCA) नियम स्वतः लागू नहीं होते।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कर्मचारियों की सेवा शर्तें केवल संबंधित विश्वविद्यालय अधिनियम, विधियों और अध्यादेशों द्वारा निर्धारित होती हैं।
कुलपति को दिया एक सप्ताह का अल्टीमेटम
प्रो. ओमशंकर ने BHU प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कुलपति और अन्य जिम्मेदार अधिकारी एक सप्ताह के भीतर इस्तीफा देकर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
अन्य प्रमुख मांगें
प्रो. ओमशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई मांगें भी रखीं, जिनमें शामिल हैं—
- CCS नियमों के आधार पर की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को रद्द किया जाए
- निलंबित या सेवा से निकाले गए कर्मचारियों को बहाल किया जाए
- सभी बकाया वेतन और लाभ का भुगतान किया जाए
- केंद्र सरकार और UGC इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएं
|BHU की स्वायत्तता बचाने की अपील
प्रो. ओमशंकर ने कहा कि BHU केवल एक विश्वविद्यालय नहीं बल्कि देश की बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने न्यायपालिका, संसद, मीडिया और नागरिक समाज से इस मामले को गंभीरता से लेने और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा करने की अपील की।