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BHU: बीएचयू ने वैश्विक पटल पर , पहली बार 'QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027' की इस टॉप श्रेणी में बनाई जगह

1001-1200 की श्रेणी से आगे बढ़कर 951-1000 के क्लब में शामिल हुआ काशी हिंदू विश्वविद्यालय; सस्टेनेबिलिटी स्कोर में 37.8% का जोरदार उछाल, कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी बोले- 'यह सामूहिक समर्पण की जीत है।'

 

शिक्षा डेस्क, भदैनी मिरर: शिक्षा की वैश्विक राजधानी कहे जाने वाले काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) ने विश्व स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित 'क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027' (QS World University Rankings 2027) में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। विश्वविद्यालय ने अपनी रैंकिंग में जबरदस्त सुधार करते हुए वर्ष 2026 की 1001-1200 की श्रेणी से आगे छलांग लगाई है और वर्ष 2027 के लिए 951-1000 की प्रतिष्ठित श्रेणी में अपना स्थान पक्का कर लिया है।

विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहला अवसर है जब बीएचयू ने इस वैश्विक लीग में यह खास मुकाम हासिल किया है। यह गौरवशाली उपलब्धि बीएचयू की शैक्षणिक उत्कृष्टता, उच्च स्तरीय शोध प्रभाव और वैश्विक सहभागिता के प्रति निरंतर प्रयासों का जीवंत प्रमाण है।

प्रमुख मानकों पर बीएचयू का दमदार प्रदर्शन

नवीनतम मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने इस बार कई महत्वपूर्ण और कड़े वैश्विक मानकों पर अपनी प्रगति का लोहा मनवाया है:

  • रिसर्च इम्पैक्ट (Research Impact): विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को वैश्विक स्तर पर बड़ी मान्यता मिल रही है। प्रति संकाय उद्धरण (साइटेशन्स पर फैकल्टी) का स्कोर 18.8 से बढ़कर अब 20.8 पर पहुंच गया है।

  • इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क (IRN): दुनिया भर के शीर्ष विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ बीएचयू का जुड़ाव और मजबूत हुआ है। इसका स्कोर 59.3 से बढ़कर 67.4 हो गया है।

  • एम्प्लॉयर रिप्यूटेशन (नियोजक प्रतिष्ठा): उद्योग जगत में बीएचयू के छात्रों की साख बढ़ी है, जिससे एम्प्लॉयर रिप्यूटेशन का स्कोर 10.6 से सुधरकर 11.4 हो गया है।

  • परिसर की विविधता: अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, जो परिसर की वैश्विक विविधता को सुदृढ़ करती है।

सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में लगाई सबसे ऊंची छलांग

इस बार की रैंकिंग में बीएचयू ने सबसे ज्यादा प्रभावित पर्यावरण और सामाजिक दायित्वों (सस्टेनेबिलिटी) के क्षेत्र में किया है। विश्वविद्यालय का सततता स्कोर 44.5 से बढ़कर सीधे 61.3 पर पहुंच गया है, जो मात्र एक वर्ष के भीतर 37.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय और ऐतिहासिक वृद्धि को प्रदर्शित करता है। यह सफलता बीएचयू परिसर में चलाई जा रही हरित पहलों, पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों और समाज के प्रति सार्थक योगदान को रेखांकित करती है।

कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने दी बधाई: "हम केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं"

विश्वविद्यालय की इस वैश्विक कामयाबी पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा:

"काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार 951-1000 की श्रेणी में स्थान प्राप्त करना हमारे लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम यहाँ तक अपने शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के सामूहिक समर्पण, सहयोग और उत्कृष्टता के बल पर पहुंचे हैं। सततता (Sustainability) के क्षेत्र में हमारी शानदार प्रगति यह साफ दर्शाती है कि हमारा विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं और चारदीवारी तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक एवं वैश्विक दायित्वों को केंद्र में रखकर कार्य कर रहा है। हमारा अंतिम उद्देश्य केवल रैंकिंग की दौड़ में शामिल होना नहीं, बल्कि एक ऐसा सुदृढ़ शैक्षणिक तंत्र बनाना है जो इन वैश्विक उपलब्धियों का वास्तविक अधिकारी हो।"

बीएचयू की यह उन्नत रैंकिंग उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, नवोन्मेषी शोध (Innovation) और सतत विकास को बढ़ावा देने के उसके दीर्घकालिक दृष्टिकोण और विजन को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करती है।