BHEL में बिना सूचना 8 गार्डों की सेवा समाप्त: भूतपूर्व सैनिकों ने DM वाराणसी को दिया ज्ञापन, जांच के आदेश
आरोप-सुपरवाइज़र ने की 30–40 हजार रुपये की डिमांड, जाति-विशेष के पक्ष में भर्ती और मनमानी; गार्ड बोले-DGR नियमों का उल्लंघन कर अचानक निकाला गया
रिपोर्ट- वीरेंद्र पटेल
वाराणसी। बीएचईएल (BHEL) में तैनात भूतपूर्व सैनिकों द्वारा सुरक्षा गार्डों को बिना किसी पूर्व सूचना के हटाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में प्रभावित गार्डों ने जिलाधिकारी वाराणसी को ज्ञापन सौंपकर पूरी घटना की शिकायत की, जिसके बाद DM ने निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं।
गार्डों का आरोप है कि संस्थान में 1 दिसंबर 2025 से नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर पक्षपात, वसूली और मनमानी हुई।
DGR और BHEL नियमों का खुला उल्लंघन?
गार्डों का कहना है कि
- DGR (Directorate General Resettlement) के नियमों के अनुसार किसी भी गार्ड को हटाने से कम से कम 3 महीने पहले सूचना देना अनिवार्य है,
- वहीं BHEL के नियमों में गार्ड की सेवा समाप्ति Date of Joining (DOJ) के आधार पर की जाती है।
लेकिन इस मामले में दोनों नियमों का पालन नहीं किया गया, बल्कि बीच की लिस्ट में से जाति-विशेष के गार्डों को चुन-चुनकर हटाया गया।
सुपरवाइज़र पर गंभीर आरोप: नगद वसूली, धमकी और मनमानी
ज्ञापन में वरिष्ठ सुपरवाइज़र महेन्द्र सिंह यादव पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार-
- उन्होंने निकाले गए गार्डों से ₹30,000–₹40,000 तक की वसूली की कोशिश की,
- पैसा न देने पर 8 गार्डों को सेवा से हटा दिया,
- भर्ती प्रक्रिया में जाति-विशेष को प्राथमिकता दी,
- उनके सहयोगी अरविंद कुमार यादव (मुंशी) भी हर महीने ₹11,000 तक नगद वसूली करते थे।
गार्डों का यह भी आरोप है कि बीमार होने पर किसी जवान की जगह ड्यूटी करने वाले दूसरे जवान का आधा भुगतान सुपरवाइज़र व मुंशी द्वारा ले लिया जाता था।
HR विभाग पर भी सवाल
गार्डों ने HR विभाग पर भी मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
राज करण मिश्रा और तन्मय कुमार दास पर आरोप है कि मामले की सूचना देने पर उन्होंने न तो कोई कार्रवाई की और न ही गार्डों से मिलने के लिए तैयार हुए। शिकायतकर्ताओं के अनुसार सुपरवाइज़र इन्हीं अफसरों का नाम लेकर धमकी देते थे।
पहले भी हो चुका है समझौता, लेकिन फिर दोहराई गई घटनाएं
पूर्व में भी इसी तरह की वसूली की शिकायत पर कर्नल पंकज कुमार सिंह, राज करण मिश्रा और महेन्द्र सिंह यादव की मौजूदगी में समझौता हुआ था, जिसमें आश्वासन दिया गया था कि भविष्य में किसी भी तरह की वसूली नहीं होगी।
गार्डों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद इस साल फिर से पैसे की डिमांड और धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया।
परिवारों की आजीविका पर संकट
गार्डों ने जिला प्रशासन को बताया कि बिना सूचना निकाले जाने से उनके परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में हैं।
उन्होंने मांग की है कि-आरोपियों पर कार्रवाई हो, हटाए गए गार्डों की जांच कर न्याय दिलाया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें
1. DGR नियमों के अनुसार कार्रवाई
2. DOJ के आधार पर निष्पक्ष सेवा समाप्ति प्रक्रिया
3. महेन्द्र सिंह यादव, अरविंद यादव और HR अधिकारियों की जांच
4. अनुचित वसूली की पूरी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा ज्ञापन को संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया है। गार्डों ने DM के हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद देते हुए भरोसा जताया कि उन्हें न्याय मिलेगा।