काशी में गरबा-डांडिया पर बजरंग दल का फरमान: गैर सनातनियों की एंट्री पर रोक, आईडी चेक करने के लिए तैनात होंगी 20 टुकड़ियां
वाराणसी के गरबा और लव जिहाद के विवाद पर बजरंग दल का बड़ा ऐलान; आयोजकों और प्रशासन को दी चेतावनी
वाराणसी, भदैनी मिरर। वाराणसी में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर होने वाले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर इन दिनों शहर में सियासत और विवाद गरमा गया है। बजरंग दल काशी ने शहर के विभिन्न लॉन और क्लबों के बाहर 'गैर सनातनी प्रवेश वर्जित' के पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी भी आयोजन में कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर आयोजक, स्थानीय प्रशासन और संबंधित व्यक्ति जिम्मेदार होंगे।
संस्कृति बचाने के नाम पर कड़े कदम
बजरंग दल काशी क्षेत्र प्रमुख निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ ने आरोप लगाया है कि गरबा मां जगदंबा के प्रति कृतज्ञता और आराधना व्यक्त करने का एक पवित्र सांस्कृतिक आयोजन है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से इसमें कुछ गैर सनातनी तत्वों के प्रवेश और नशाखोरी को बढ़ावा मिलने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संगठन ने पहले ही पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर विशेष निगरानी की मांग की थी।
आधार कार्ड, कलावा और टीका से होगी पहचान
संगठन की योजना के मुताबिक, इस साल शहर के आयोजन स्थलों के बाहर बजरंग दल के कार्यकर्ता पूरी रात गश्त करेंगे। कुल 20 टुकड़ियों में तैनात लगभग 10-10 कार्यकर्ता हर आने-जाने वाले की पहचान सुनिश्चित करेंगे। आयोजन स्थल पर प्रवेश से पहले आधार कार्ड की जांच की जाएगी। सनातन धर्म से जुड़े लोगों को कलावा बांधा जाएगा और माथे पर टीका लगाया जाएगा।
निखिल त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह कोई निजी आयोजन नहीं है, बल्कि सनातन धर्म का आयोजन है, जिसमें हम मां दुर्गा की आराधना करते हैं। बजरंग दल का ध्येय वाक्य सेवा, सुरक्षा और संस्कार है। यदि कोई अमर्यादित या असंस्कारित तत्व मिलता है, तो बजरंग दल उसे अपने तरीके से 'संस्कार' सिखाएगा।"
धार्मिक आधार पर प्रवेश प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था के इस नए फरमान के बाद से वाराणसी में बहस तेज हो गई है। एक तरफ जहां आयोजक और प्रशासन इस पर नजर बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।a