बुढ़वा मंगल पर अस्सी घाट गूंजा: शहनाई, काव्य और संगीत से काशी में ‘लोक के महामंगल’ की कामना
पं. जवाहरलाल की शहनाई से हुआ शुभारंभ, 24 कवियों ने किया काव्यपाठ; पद्मश्री चयनित प्रो. मंगला कपूर का सम्मान
वाराणसी। सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में बुढ़वा मंगल का पारंपरिक उत्सव इस बार भी पूरे उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। अस्सी घाट पर आयोजित कार्यक्रम में शहनाई, काव्य और संगीत के माध्यम से लोक के कल्याण और ‘महामंगल’ की कामना मुखर हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध शहनाई वादक पं. जवाहरलाल और उनके साथियों की मधुर मंगलध्वनि से हुई। उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और उत्सवमय बना दिया।
कार्यक्रम के काव्य मंगल सत्र में 12 कवियों और 12 कवयित्रियों ने कविता, गीत, ग़ज़ल और छंदों के माध्यम से फागुन की मस्ती और लोकमंगल की भावना को अभिव्यक्त किया।
इस सत्र की खास शुरुआत काशी के दिवंगत साहित्यकार पं. अशोक मिश्र ‘सामयिक’ द्वारा रचित बुढ़वा मंगल की आरती से हुई, जिसे सामूहिक रूप से गाया गया।
सम्मान मंगल में मंगला कपूर का सम्मान
कार्यक्रम के सम्मान मंगल सत्र में देश की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर और प्रख्यात गायिका प्रो. मंगला कपूर को सम्मानित किया गया। हाल ही में उन्हें पद्मश्री के लिए चयनित किया गया है, जिसे लेकर काशीवासियों में विशेष उत्साह देखा गया।
सुर मंगल में सजी संगीत की महफिल
सुर मंगल सत्र में लोक और उपशास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। आकाशवाणी के टॉप ग्रेड गायक डॉ. विजय कपूर ने चैती और होरी के पारंपरिक गीतों से माहौल को जीवंत कर दिया। इसके बाद बीएचयू की डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य ने बनारसी गायकी की छटा बिखेरते हुए दादरा, होरी और चैती प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गुलाब वर्षा और बनारसी रंग
गुलाब की पंखुड़ियों और गुलाब जल की वर्षा के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में बनारसी संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। बड़ी संख्या में काशीवासी इस आयोजन के साक्षी बने और पूरे उत्साह से शामिल हुए।
इस पूरे आयोजन का सीधा प्रसारण यूट्यूब चैनल ‘बनारसी किस्से’ पर किया गया। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं, जिनमें शिक्षाविद, साहित्यकार और समाजसेवी शामिल थे।