IIT-BHU में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: प्रमोशन और आवास आवंटन की मांग को लेकर निदेशक कार्यालय का घेराव
लंबित प्रमोशन, आवास आवंटन में अनियमितता और अलग नियमों को लेकर कर्मचारियों ने गेट पर की नारेबाजी
वाराणसी (भदैनी मिरर): आईआईटी बीएचयू (IIT-BHU) में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के सब्र का बांध शुक्रवार को टूट गया। गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के फोरम के बैनर तले दर्जनों कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर निदेशक कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों के अचानक हुए प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने तथा कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया।
संवाद के बावजूद अनदेखी का आरोप
फोरम के अध्यक्ष गोपाल यादव ने संस्थान प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारियों की वाजिब समस्याओं को लेकर प्रशासन बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया, "कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और व्यवस्थित संवाद के लिए 17 जुलाई को फोरम का चुनाव हुआ था। तीन महीने बीत जाने के बाद भी प्रमुख समस्याएं जस की तस हैं। जब फोरम के प्रतिनिधियों को ही जवाब नहीं मिल पा रहा है, तो आम कर्मचारियों की सुनवाई कैसे होगी?"
गोपाल यादव ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि चार साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके एक कर्मचारी को अब तक अपने बकाये का स्पष्ट जवाब तक नहीं मिला है।
64 कर्मचारियों का प्रमोशन अटका, आवास में भी धांधली का आरोप
फोरम अध्यक्ष ने कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए बताया कि:
-
प्रमोशन का मुद्दा: 19 कर्मचारियों को तो प्रमोशन दे दिया गया, लेकिन 64 पात्र कर्मचारियों का प्रमोशन मामला जानबूझकर लंबित रखा गया है।
-
आवास आवंटन: आवास आवंटन की प्रक्रिया में वरिष्ठता का पालन नहीं हो रहा है और कई वरिष्ठ कर्मचारियों के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं।
-
अन्य मांगें: दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए समय पर एनओसी (NOC) देने की मांग शामिल है।
परीक्षण नियमों में समानता की मांग
कर्मचारी नेता ने बताया कि 9 जून 2025 को तकनीकी कर्मचारियों ने लिखित परीक्षा का विरोध किया था, जिसके बाद 13 जून को व्यवस्था बदलते हुए 'जॉब रिलेटेड टेस्ट' की प्रक्रिया अपनाई गई। लेकिन मंत्रालयिक संवर्ग के कर्मचारियों के लिए अब भी अलग और कड़े नियम लागू हैं। फोरम ने सभी संवर्गों के लिए एक समान नियम लागू करने की मांग की है।
निदेशक से गुहार और उग्र आंदोलन की चेतावनी
फोरम की ओर से बताया गया कि 21 जुलाई और 24 सितंबर को प्रशासन को लिखित शिकायतें और ईमेल भेजकर जवाब मांगा गया था, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। कर्मचारियों ने निदेशक प्रो. अमित पात्रा से खुद कर्मचारियों के बीच आकर संवाद करने और समस्याओं के समाधान के लिए एक निश्चित समयसीमा तय करने की अपील की है।
फोरम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे संस्थान के दीक्षांत समारोह जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में बाधा नहीं डालना चाहते, लेकिन यदि प्रशासन ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो कर्मचारी धरना देकर आंदोलन को और उग्र करने तथा सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।