निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम गंजारी के आसपास के प्रभावित किसानों ने प्रस्तावित परियोजना का किया विरोध
नई अर्बन टाउनशिप काशी स्पोर्ट सिटी परियोजना को लेकर राजातालाब तहसील में हुई लोक सुनवाई
किसानों ने कहा-पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी हैं हमारी जमीने, अब एक इंच भी जमीन देनों को नही हैं तैयार
वाराणसी, भदैनी मिरर। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण / नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निकट नई अर्बन टाउनशिप काशी स्पोर्ट सिटी परियोजना के तहत राजातालाब तहसील के गंजारी, हरपुर, शिवसागर, परगना कसवार राजा तहसील राजातालाब जनपद वाराणसी से प्रस्तावित भूमि रकबा 64.4891 हेक्टेयर भूमि का अर्जन किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए जिलाधिकारी के निर्देशानुसार मंगलवार को राजातालाब तहसील परिसर स्थित सभागार में प्रस्तावित भूमि में हित रखने वाले भू स्वामियों की आपत्ति, सुझाव सुनने के लिए उप जिलाधिकारी राजातालाब शांतुन कुमार सिनसिनवार की मौजूदगी में जनसुनवाई हुई।
इस दौरान पहुंचे सैकड़ों प्रभावित किसानों ने अपने आपत्ति पत्रों की रिसीविंग की मांग की। इस पर उपजिलाधिकारी ने बताया कि लेखपालों के माध्यम से रिसीविंग उपलब्ध कराई जाएगी। किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी आपत्तियां रखते हुए कहा कि प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण से उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। किसानों ने आरोप लगाया कि सामाजिक समघात (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) की 86 पृष्ठों की रिपोर्ट एथिक्यूरेट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से तैयार कर प्रस्तुत की गई है, लेकिन इस सर्वे के दौरान ग्रामीणों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई और न ही उनसे किसी प्रकार की राय ली गई। किसानों का कहना था कि बिना ग्रामीणों की सहभागिता के तैयार की गई यह रिपोर्ट वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती और पूरी तरह गलत है।
ग्रामीणों ने बताया कि गंजारी और हरपुर क्षेत्र के किसानों के बड़े भू-भाग को पहले ही विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और रिंग रोड परियोजना के लिए भी इन गांवों की काफी जमीन ली जा चुकी है। इसके कारण अब किसानों के पास बहुत कम खेती योग्य जमीन बची है। किसानों ने कहाकि खेती ही उनके परिवार की मुख्य आजीविका है। यदि बची हुई जमीन भी अधिग्रहित कर ली गई तो उनके सामने रोजगार और जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर वे अपनी शेष जमीन किसी भी सूरत में नहीं देंगे और इसे अपने परिवार की आजीविका के लिए सुरक्षित रखेंगे। प्रशासन की ओर से किसानों द्वारा दिए गए आपत्ति पत्रों और सुझावों को संकलित कर आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। सुनवाई के दौरान तहसील परिसर में बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी रही।