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जानलेवा कफ सिरप तस्करी के राजदार थे अधिवक्ता राजा आनंद ज्योति सिंह, तो उन्हें इसलिए मार दिया गया

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद से राजा के पिता और पत्नी ने मिलकर की जांच की मांग

 

30 नवम्बर 24 को मकबूल आलम रोड स्थित अस्पताल में हुई थी राजा की मौत

एक दिन पहले फेसबुक पर लाइव आकर तस्करी के राजफाश का किया था एलान

कोल्ड काफी में जहर दिया गया था, बाहुबली के साथ शुभम जायसवाल और अमित सिंह टाटा पर लगाया था आरोप

वाराणसी, भदैनी मिरर। चर्चित जानलेवा कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी कांड के तार सेंट्रल बार के पूर्व उपाध्यक्ष अधिवक्ता 34 वर्षीय राजा आनंद ज्योति सिंह की कथित हत्या से जुड़ गये हैं। एक साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में हुई राजा आंनद ज्योति के मामले में उनके पिता ने चौबेपुर थाने में तहरीर दी थी। सिरप तस्करी के मास्टरमाइंड और प्रहलाद घाट निवासी शुभम जायसवाल और उसके पार्टनर और जौनपुर के बाहुबली के करीबी अधिवक्ता अमित सिंह टाटा पर साजिश के तहत जहर देकर बेटे को मारने का आरोप लगाया था। पिता के आरोप की वजह यह थी कि राजा आनंद ज्योति सिंह शुभम और अमित सिंह टाटा की इस काली करतूत को जानते थे। उन्होंने फेसबुक पर लाइव आकर इन तस्करों का राजफाश करने का एलान कर दिया था। इससे पहले राजा आनंद ज्योति सिंह की मौत हो गई। 


आपको बता दें कि कोडीनयुक्त कफ सीरप पीने से मध्य प्रदेश में 20 बच्चों की मौत के बाद जांच में इन काले कारोबारियों के नाम उजागर हुए। शुभम का पिता भोला जायसवाल भी इस मामले में आरापित है और एक दिन पहले कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट से एसआईटी ने उसे गिरफ्तार किया है। 
अब लगे हाथ चौबेपुर थाना क्षेत्र के बर्थराकला के रहनेवाले राजा आनंद ज्योति सिंह की मौत की जांच एक बार फिर शुरू होने जा रही है। जानकारी के अनुसार राजा आनंद ज्योति को अमित सिंह टाटा और शुभम जायसवाल के काले कारोबार की बखूबी जानकारी थी। अमित सिंह टाटा जौनपुर के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह का करीबी रहा है। पूर्व सांसद के साथ उसकी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए है। अमित सिंह टाटा मूल रूप से जौनपुर का ही निवासी है और वह वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के सिकरौल मोहल्ले में ठिकाना बनाकर रहता रहा। अमित टाटा चौबेपुर थाना क्षेत्र के ही मूल निवासी माफिया डॉन का भी करीबी रहा है । कचहरी में माफिया डॉन के मुकदमे के दौरान वह भी सक्रिय रहता था। इन बाहुबलियों से सम्बंधों के कारण वह जरायम जगत के लोगों से जुड़ा रहा। 


रही बात राजा आनंद ज्योति सिंह की मौत की तो उसके तार अमित सिंह टाटा और शुभम जायसवाल से जुड़े हैं। पिछले शनिवार को प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद जायसवाल वाराणसी आये थे तो राजा आनंद ज्योति के पिता उमेश प्रताप सिंह और पत्नी भारती सिंह ने उनसे मुलाकात की थी। उन्होंने राजा आनंद ज्योति को जहर देकर मारने का आरोप शुभम और अमित पर लगाया। मामले की जांच की मांग की। आपको बता दें कि कफ सिरप कांड में अमित सिंह टाटा और शुभम के पिता भोला गिरफ्तार हो चुके हैं। शुभम के परिवार समेत दुबई भागने की चर्चा है। इधर, डिप्टी सीएम से मिलने वाले राजा आनंद ज्योति सिंह के पिता और पत्नी ने बताया कि राजा आनंद ज्योति सिंह को तस्करी मामले में दोनों की संलिप्तता की बखूबी जानकारी थी। इसके बारे में वह फेसबुक पर लाइव आकर खुलासा करने वाले थे। इसके एक दिन पहले शुभम ने राजा आंनद ज्योति सिंह को कई बार व्हाट्सएप काल किया था। इसके बाद धोखे से एक पार्टी में कॉफी में जहर मिलाकर दिया गया। इससे उनकी 30 नवम्बर 2.24 को मौत हो गई थी। पिता ने चौबेपुर थाने में इन तस्करों के खिलाफ नामजद तहरीर दी, लेकिन बाहुबलियों के प्रभाव के कारण पुलिस ने मामले को दबा दिया। कहाकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नही है। अब जब जहरीले कफ सीरप कांड की आंच सत्ताधारियों तक पहुंची तो जांच में तेजी आ गई। दो महत्वपूर्ण गिरफ्तारियों के बाद अब पुलिस ने राजा आंनद ज्योति सिंह मौत मामले की जांच शुरू कर दी है। डीसीपी वरुणा जोन और एसीपी सारनाथ ने मामले की फाइल दोबारा खोलते हुए, पुरानी केस डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुरक्षित रखा गया विसरा, सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर जैसे अहम साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
आपको यह भी बता दें कि एसटीएफ ने बाहुबली पूर्व सांसद के करीबी और बर्खास्त सिपाही को भी अमित सिंह टाटा के साथ पकड़ा था। यह बर्खात सिपाही भी अमित सिंह के साथ उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने गया था। चर्चा है कि पूर्व सांसद के प्रभाव के कारण पुलिस ने बर्खास्त सिपाही को छोड़ दिया था। सूत्र बताते हैं कि एसटीएफ की पूछताछ में बर्खास्त सिपाही ने खुलासा किया कि शुभम और एबॉट कंपनी के कुछ अधिकारी 100 करोड़ रुपये से अधिक के कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री में शामिल हैं। शुभम फेसटाइम ऐप के जरिए और उसका पार्टनर विकास सिंह जंगी ऐप से संवाद करता है। जीएसटी भुगतान शुभम का सीए तुषार करता था, जिसने फरवरी, मार्च, अप्रैल और नवंबर 2025 के पेमेंट किए गए। 

वाराणसी कचहरी के अधिवक्ता राजा आनंद ज्योति सिंह की संदिग्ध मौत के मामले में उनके पिता ने एक बाहुबली पर साजिश के तहत जहर देकर हत्या का आरोप लगाया था। यह मामला 30 नवंबर 2024 को सामने आया, जब वे दोस्तों के साथ पार्टी के बाद एक रिंग सेरेमनी में शामिल होने के बाद घर लौटे और बीमार पड़ गए। राजा आनंद ज्योति सिंह के पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक बाहुबली ने साजिश रचकर उन्हें जहर दिया। रात में दोस्तों के साथ पार्टी में शामिल होने के बाद एक रिंग सेरेमनी में शामिल हुए थे। घर पहुंचने पर अचानक उल्टियां होने लगीं। राजा आनंद ज्योति सिंह की मकबूल आलम रोड स्थित एक अस्पताल में मौत हुई थी। परिजनों के मुताबिक रोज की तरह आनंद ज्योति कचहरी गये थे। देर शाम दोस्तों के साथ किसी रेस्टोरेंट में बिरयानी, मोमोज खाया और कॉफी पी। इसके बाद बहनोई के छोटे भाई की रिंग सेरेमनी में भक्तिनगर कार से गए। घर आये तो हालत बिगड़ने लगी। उन्हें नजदीकी चिकित्सालय ले जाया गया। देर रात हालत और बिगड़ने पर दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया। परिजन उन्हें मकबूल आलम रोज स्थित अस्पताल ले आए। जहां सुबह 5 बजे राजा आनंद ज्योति को मृत घोषित कर दिया गया। राजा का शरीर, आंख, नाखून नीला पड़ गया था। पोस्टमार्टम हाउस पर चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह भी मौजूद थे। वीरेंद्र सिंह को भी राजा आंनद ज्योति के परिवारवालों ने शुभम और अमित की संलिप्तता की पूरी जानकारी दी थी। यही वजह है कि आज सांसद वीरेंद्र सिंह इस मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भी इस घटना के बारे में जानते हैं और उन्होंने भी न्यायिक जांच की मांग की है। क्योंकि उन्हें भरोसा है कि एसआईटी जांच में उन सफेदपोशों को छोड़ा जा सकता है जो इस काली कमाई के हिस्सेदार है। राजा आनंद ज्योति सिंह दो भाइयों में छोटे थे। बड़े भाई बृजेश प्रताप सिंह कृषि विभाग चंदौली में हैं। पिता उमेश प्रताप सिंह खेती करते हैं। राजा आनंद ज्योति को एक बेटी और दो बेटे हैं।