प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पर गरजे एबीवीपी कार्यकर्ता, जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा 8 सूत्रीय मांग पत्र
'तय दुकानों से महंगी किताबें-ड्रेस का दबाव और हर साल 20% तक फीस वृद्धि बर्दाश्त नहीं'; ABVP के विभाग संयोजक आकाश प्रताप सिंह ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): वाराणसी के निजी स्कूलों (Private Schools) द्वारा की जा रही मनमानी, अवैध फीस वसूली और शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को एबीवीपी काशी विभाग के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता और शैक्षिक भ्रष्टाचार के विरोध में नारेबाजी की और जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक 8 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
मजदूर का बेटा ₹12,000 फीस कैसे भरेगा? - आकाश प्रताप सिंह
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एबीवीपी वाराणसी विभाग के विभाग संयोजक आकाश प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत में तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जब एक गरीब मजदूर पूरे महीने मेहनत करके बमुश्किल 10 हजार रुपये कमाता है, तो वह अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए हर महीने 12-12 हजार रुपये फीस कहां से देगा? प्राइवेट स्कूलों ने हर साल 15 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ाना अपना नियम बना लिया है, जो कि पूरी तरह अनैतिक है।"
उन्होंने आगे कहा कि सरकारी स्कूलों में फीस वृद्धि भले न हो, लेकिन वहां शिक्षा की गुणवत्ता गायब है। वहीं दूसरी तरफ, प्राइवेट स्कूल हर साल ड्रेस बदल देते हैं। ऐसी कौन सी शिक्षा नीति है कि बड़े भाई की पढ़ी हुई किताबें उसका छोटा भाई अगली कक्षा में इस्तेमाल नहीं कर सकता? हर साल जानबूझकर प्रकाशक बदल दिए जाते हैं ताकि अभिभावकों की जेब डाका डाला जा सके।
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एबीवीपी के ज्ञापन में शामिल 8 मुख्य मांगें:
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किताब-ड्रेस सिंडिकेट पर रोक: स्कूल द्वारा तय की गई निश्चित दुकानों और वेंडरों से ही महंगी किताबें व ड्रेस खरीदने के दबाव पर तत्काल रोक लगाई जाए और ऐसे स्कूलों पर कठोर कार्रवाई हो।
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RTE (25% कोटा) सूची सार्वजनिक हो: शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत गरीब और वंचित बच्चों के लिए आरक्षित 25% सीटों पर हुए एडमिशंस की सूची को सार्वजनिक किया जाए।
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मनमानी री-एडमिशन फीस पर रोक: हर साल अगली कक्षा में जाने पर ली जाने वाली एकमुश्त री-एडमिशन फीस पर पूरी तरह रोक लगे और एक तय मानक गाइडलाइन बने।
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निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर एक्शन: एलकेजी (LKG) की किताबों के नाम पर 3 से 4 हजार और उच्च कक्षाओं के लिए 7 हजार रुपये तक वसूलने वाले स्कूलों को चिन्हित कर कार्रवाई हो और एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यक्रम अनिवार्य किया जाए।
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शुल्क निर्धारण के लिए बने कड़ा नियम: निजी स्कूलों की बेतहाशा बढ़ती फीस को रोकने के लिए सरकार सख्त नियम बनाए और स्कूलों से अनिवार्य रूप से शपथ पत्र लिया जाए।
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NEP 2020 का हो पालन: नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के नियमों का उल्लंघन कर अपनी मनमानी चलाने वाले निजी प्रकाशकों की किताबों को बैन किया जाए।
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अवैध स्कूलों पर चले बुलडोजर: जिले में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की नाक के नीचे बिना मान्यता और बिना मानक के अवैध रूप से चल रहे स्कूलों पर 'बुलडोजर' की कार्रवाई की जाए।
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शासकीय सहायता प्राप्त स्कूलों की जांच: एडेड स्कूलों में भी कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों से हो रही अवैध वसूली के प्रबंध तंत्र पर कानूनी शिकंजा कसा जाए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो पूरे प्रदेश में होगा चरणबद्ध आंदोलन
एबीवीपी नेता आकाश प्रताप सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षा विभाग के कई भ्रष्ट अधिकारी मुख्यमंत्री जी के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं और निजी स्कूलों के प्रबंधकों से मिले हुए हैं। विद्यार्थी परिषद हमेशा छात्र हितों के लिए सचेत रहने वाला संगठन है। यदि प्रशासन और सरकार ने इन गंभीर बिंदुओं पर त्वरित व सख्त एक्शन नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पूरे उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से एक वृहद आंदोलन के लिए बाध्य होगी।