{"vars":{"id": "125128:4947"}}

बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में हुई 62 नियुक्तियों की जांच के लिए कमेटी गठित, उठ रहे फर्जीवाड़े के सवाल

पूर्व पीआई प्रो. सौरभ सिंह के कार्यकाल में हुई भर्तियों पर धांधली के आरोप; प्रो. संजीव गुप्ता की अध्यक्षता में बनी 5 सदस्यीय जांच समिति।

 

वाराणसी / भदैनी मिरर: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के ट्रॉमा सेंटर में दस महीने पहले हुई 62 भर्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व प्रोफेसर इंचार्ज (PI) प्रो. सौरभ सिंह के कार्यकाल में हुई इन नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी और धांधली की लगातार तीन शिकायतों के बाद आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है।

मानकों की अनदेखी और फर्जी कागजातों के आरोप

नवंबर 2025 में ट्रॉमा सेंटर में रेडियोग्राफर, ओटी टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन समेत 62 विभिन्न पदों पर भर्तियां की गई थीं। शिकायतों के अनुसार, इन नियुक्तियों में निर्धारित योग्यता के मानकों को दरकिनार किया गया और कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति कथित तौर पर फर्जी डॉक्युमेंट्स के आधार पर की गई।

प्रो. संजीव गुप्ता की अध्यक्षता में बनी जांच समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इस समिति के अध्यक्ष ट्रॉमा सेंटर के पूर्व इंचार्ज एवं सर्जरी विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. संजीव गुप्ता बनाए गए हैं।

कमेटी में शामिल सदस्य:

  • प्रो. संजीव गुप्ता (अध्यक्ष) - पूर्व पीआई, ट्रॉमा सेंटर एवं रिटायर प्रो. सर्जरी विभाग

  • प्रो. विजयनाथ मिश्रा - न्यूरोलॉजी विभाग

  • प्रो. शशि प्रकाश मिश्रा - सर्जरी विभाग

  • प्रो. विश्वंभर सिंह - ईएनटी विभाग

  • शारदूल चौबे - सहायक कुलसचिव (AR), ट्रॉमा सेंटर

(उल्लेखनीय है कि पूर्व में गठित समिति में प्रो. संजीव गुप्ता ने शामिल होने से इनकार कर दिया था, लेकिन दोबारा अनुरोध किए जाने पर वे जांच की जिम्मेदारी संभालने के लिए सहमत हुए हैं।)

इन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित होगी जांच:

  • मानकों का पालन: भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित योग्यताओं और नियमों का सही से पालन हुआ है या नहीं।

  • दस्तावेजों का सत्यापन: नियुक्त 62 कर्मचारियों के शैक्षणिक और तकनीकी प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता की जांच।

  • अनुमोदन की स्थिति: नियुक्ति प्रक्रिया के लिए उच्च अधिकारियों (Higher Authority) से नियमानुसार अप्रूवल लिया गया था या नहीं।

  • बयान दर्ज करना: शिकायतकर्ताओं और पूर्व प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह का पक्ष सुनकर बयान दर्ज किया जाएगा।

जांच समिति सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का गहन परीक्षण करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट आईएमएस बीएचयू के निदेशक को सौंपेगी। फर्जी कागजात पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।