UP: "राम मंदिर घोटाले के 26 सबूतों के साथ जाऊंगा कोर्ट", संजय सिंह का बड़ा एलान
'आप' सांसद का योगी सरकार पर तीखा तंज- पीएम मोदी के बनाए ट्रस्ट की जांच करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है सीएमओ
लखनऊ। आम आदमी पार्टी (AAP) के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक बार फिर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और जमीन खरीद में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर राज्य की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। संजय सिंह ने प्रदेश सरकार पर बड़े घोटालेबाजों को संरक्षण देने और जांच को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने एलान किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेबसी के बाद अब वे खुद 26 पुख्ता दस्तावेजों (सबूतों) के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे ताकि प्रभु श्रीराम के नाम पर चंदा लूटने वालों को सजा मिल सके।
"दूध का दूध और पानी का पानी करने की कसम खोखली साबित हुई"
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पुराने बयानों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब पहली बार मंदिर में हेराफेरी का मामला सामने आया था, तब मुख्यमंत्री ने बड़े दावों के साथ कहा था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और एसआईटी (SIT) जांच से सब साफ हो जाएगा। लेकिन अब जो स्थिति सामने आ रही है, उससे साफ है कि एसआईटी को न तो निर्माण कार्यों की जांच करने दी जा रही है और न ही जमीन घोटाले की। यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश है।
"मंदिर निर्माण में 40 फीसदी कमीशन की डकैती"
संजय सिंह ने मंदिर निर्माण की गुणवत्ता और बजट पर सवाल उठाते हुए कहा:
"भगवान राम के मंदिर निर्माण में 40-40 फीसदी कमीशन लिया जाना घोर पाप है और यह कोई हवाई आरोप नहीं है। यह जानकारी स्वयं इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने सार्वजनिक की है। अगर निर्माण कार्य में इतनी बड़ी डकैती हुई है, तो सरकार इसकी जांच कराने से क्यों पीछे भाग रही है? क्या राम भक्तों की आस्था की कमाई पर डाका डालने वाले बेईमानों को सरकारी संरक्षण मिल रहा है?"
कागजात चिल्ला-चिल्लाकर दे रहे घोटाले की गवाही: संजय सिंह
जमीन खरीद-बिक्री के चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए 'आप' सांसद ने कहा कि सारे कागजात खुद घोटाले की गवाही दे रहे हैं। उन्होंने प्रमुख उदाहरण देते हुए बताया:
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महज 5 मिनट के भीतर 2 करोड़ की जमीन को 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट द्वारा खरीदा गया।
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नजूल की वह जमीन, जिसे न खरीदा जा सकता है और न बेचा जा सकता है, उसे 24 करोड़ रुपये में ठिकाने लगा दिया गया।
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9 करोड़ की जमीन को 55 करोड़ में और 1.73 करोड़ की जमीन को 29.67 करोड़ रुपये में खरीदा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह आम जनता द्वारा दिए गए चंदे के पैसे का खुला दुरुपयोग है।
"पीएमओ के सामने नतमस्तक हुआ सीएमओ"
संजय सिंह ने मुख्यमंत्री की प्रशासनिक बेबसी का कारण बताते हुए कहा कि यह ट्रस्ट सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित किया गया है, जिसमें नृपेंद्र मिश्रा जैसे उनके सबसे करीबी लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा:
"मैंने पहले ही कहा था और आज फिर दोहरा रहा हूँ कि यूपी का सीएमओ (CMO), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकता। चूंकि इसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और भाजपा के तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के करीबियों के नाम शामिल हैं, इसलिए मुख्यमंत्री चाहकर भी इन भ्रष्टाचारियों पर हाथ डालने में पूरी तरह बेबस हैं।"
रामद्रोहियों के खिलाफ अब अदालत में होगी आर-पार की लड़ाई
सांसद संजय सिंह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि 'जय श्री राम' का नारा लगाकर प्रभु को ही लूटने वाले इन 'रामद्रोहियों' को देश के करोड़ों रामभक्त कभी माफ नहीं करेंगे। चूंकि राज्य सरकार इस मामले को रफा-दफा करने में जुटी है, इसलिए वे अब चुप नहीं बैठेंगे। वे बहुत जल्द सभी 26 पुख्ता सबूतों और दस्तावेजों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश करेंगे और कानूनी लड़ाई के जरिए इस महाघोटाले का पर्दाफाश करेंगे।