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UP FSDA Order: यूपी के अस्पतालों में बंद होगी दवाओं की लूट! अब मरीज जान सकेंगे दवा की खरीद (PTR) और बिक्री (PTC) कीमत

अस्पतालों और रिटेल फार्मेसियों को पब्लिक वेबसाइट बनाना अनिवार्य; दवाओं के MRP और खरीद मूल्य में भारी अंतर पर कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब की बड़ी कार्रवाई।

 

भदैनी मिरर हेल्थ & यूटिलिटी डेस्क: उत्तर प्रदेश में अस्पताल फार्मेसियों द्वारा दवाओं की MRP और वास्तविक खरीद दर के बीच भारी अंतर के जरिए मरीजों से की जा रही अधिक वसूली पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश (UP FSDA) ने प्रदेश की सभी रिटेल एवं अस्पताल फार्मेसियों को अपनी पब्लिक वेबसाइट स्थापित करने और उस पर आवश्यक डेटा सार्वजनिक करने का सख्त निर्देश दिया है।

इस नई व्यवस्था के तहत अस्पताल फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर दवाओं की प्राइस टू रिटेल (PTR - खरीद दर) और प्राइस टू कंज्यूमर (PTC - मरीज के लिए बिक्री दर) को प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।

मरीजों को कैसे मिलेगा फायदा? (PTR और PTC का गणित)

अस्पतालों में भर्ती मरीजों (In-patients) के पास अक्सर बाहर से दवा खरीदने का विकल्प नहीं होता। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर अस्पताल फार्मेसियां मैन्युफैक्चरर से भारी छूट पर खरीदी गई दवाओं को मरीजों को उच्चतम एमआरपी पर बेचती थीं।

  • PTR (Price To Retail): वह दर जिस पर अस्पताल या फार्मेसी ने निर्माता/स्टॉकिस्ट से दवा खरीदी है।

  • PTC (Price To Consumer): वह दर जिस पर फार्मेसी मरीज को दवा बेच रही है।

अब वेबसाइट और क्यूआर कोड के माध्यम से मरीज और उनके परिजन एक क्लिक में यह देख सकेंगे कि जो दवा उन्हें बेची जा रही है, उसकी असल खरीद कीमत क्या है और अस्पताल उनसे कितना मुनाफा वसूल रहा है।

कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब का सख्त आदेश: DPCO नियमों का पालन अनिवार्य

एफएसडीए कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO)-2013 के प्रस्तर 25 के तहत हर रिटेलर को मूल्य सूची ऐसे स्थान पर प्रदर्शित करनी होती है, जहाँ से ग्राहक उसे आसानी से देख सके।

हालिया जांच में पाया गया कि दवा कंपनियां अस्पतालों को MRP से काफी कम दरों पर दवाएं सप्लाई करती हैं, लेकिन अस्पताल इसका लाभ मरीजों तक पहुँचाने के बजाय खुद मोटा मुनाफा कमाते हैं। अत्यधिक मूल्य अंतर होने से नकली या घटिया (Spurious) दवाओं के प्रचलन की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी पारदर्शिता को बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों के संदर्भ में यह निर्णय लिया गया है।

हर रिटेल फार्मेसी के लिए तय हुए नए नियम

प्रदेश की सभी निजी व अस्पताल रिटेल फार्मेसियों को निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा:

  1. पब्लिक वेबसाइट अनिवार्य: प्रत्येक फार्मेसी को अपनी वेबसाइट बनानी होगी, जिस पर फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, मालिक का नाम और पता दर्ज होगा।

  2. फर्मासिस्ट का ब्यौरा: नियुक्त फार्मासिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और फोटो वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

  3. साप्ताहिक स्टॉक अपडेट: दुकान या फार्मेसी में उपलब्ध स्टॉक की जानकारी हर हफ्ते अपडेट करनी होगी।

  4. काउंटर पर QR कोड और URL: ग्राहकों की सहूलियत के लिए मेडिकल स्टोर के काउंटर पर वेबसाइट का URL और QR Code बड़े अक्षरों में लगाना होगा, जिसे मोबाइल से स्कैन करके पूरी जानकारी देखी जा सकेगी।

मूल्य नियंत्रण नहीं, 'सेल्फ-डिस्क्लोजर' व्यवस्था

यूपी एफएसडीए ने साफ किया है कि यह कोई प्राइस कैपिंग (मूल्य नियंत्रण) का आदेश नहीं है, बल्कि यह 'सेल्फ-डिस्क्लोजर' (स्व-घोषणा) पर आधारित पारदर्शिता मॉडल है। इससे मरीजों को अपनी दवा और उसकी वाजिब कीमत जानने का अधिकार मिलेगा, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और जनविश्वास दोनों मजबूत होंगे।