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UP Electricity Bill: यूपी के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, 10% ईंधन अधिभार लगाने का फैसला गैर-कानूनी

विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन को थमाया नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब; उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत

 

लखनऊ (भदैनी मिरर डेस्क): उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। राज्य में अब बिजली का बिल 10 फीसदी महंगा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने पावर कॉर्पोरेशन द्वारा बिजली बिलों में 10% ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) वसूलने के आदेश को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया है। इसके साथ ही आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए पावर कॉर्पोरेशन को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

जून महीने में तगड़ा झटका देने की थी तैयारी

आपको बता दें कि पावर कॉर्पोरेशन ने मार्च 2026 के ईंधन अधिभार के नाम पर उपभोक्ताओं से 10 फीसदी अतिरिक्त वसूली का आदेश जारी किया था। इस फैसले के बाद यह तय माना जा रहा था कि जून महीने में आने वाला बिजली का बिल 10% बढ़कर आएगा। कॉर्पोरेशन के इस फैसले से आम जनता की जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला था, लेकिन नियामक आयोग के दखल के बाद फिलहाल इस वसूली पर ब्रेक लग गया है।

उपभोक्ता परिषद ने खोला मोर्चा, नियमों की अनदेखी आई सामने

इस मामले को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात की। उपभोक्ता परिषद ने एक लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करते हुए कॉर्पोरेशन की इस मनमानी की पोल खोली।

अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि: "ईंधन अधिभार के नाम पर पावर कॉर्पोरेशन ने मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ-साथ लगभग 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाये दावों और पिछली देनदारियों को भी चुपके से जोड़ दिया था। यह पूरी तरह से आयोग के स्थापित नियमों के खिलाफ है।"

नियामक आयोग ने कहा- 'उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ डालना गलत'

मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन की इस गणना को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि कॉर्पोरेशन की पुरानी देनदारियों को चालू वित्तीय गणना में शामिल करना विनियम 16.1 के प्रावधानों के खिलाफ और असंगत है। ऐसा करने से सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर अनुचित वित्तीय बोझ पड़ता है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन को अगले 7 दिनों में विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है। साथ ही वर्तमान और पूर्व की बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क (Transmission Charges) का पूरा ब्योरा भी तलब किया है। कॉर्पोरेशन के जवाब के बाद ही आयोग इस पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।

उपभोक्ताओं के साथ हुआ न्याय

नियामक आयोग के इस कदम की सराहना करते हुए उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग ने समय रहते उपभोक्ताओं के साथ न्याय किया है। आयोग की सख्त टिप्पणियों से यह साफ हो गया है कि पावर कॉर्पोरेशन गलत तरीके से जनता की जेब पर डाका डालने की कोशिश कर रहा था। इस फैसले से प्रदेश के उपभोक्ताओं को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।