महाशिवरात्रि को लापता 7 साल के इकलौते बेटे का क्षत-विक्षत शव प्रधान के खेत में मिला
12 दिन से लापता था संभल जिले के धनारी पट्टी बालू शंकर के रोहित का बेटा, गांव में सनसनी
गले में लिपटा मिला काला गमछा, पहचान न हो सके इसलिए विकृत कर दिया गया था चेहरा
सम्भल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के धनारी पट्टी बालू शंकर में 12 दिन से लापता सात वर्षीय बालक अंशू का शव गांव से एक किलोमीटर दूर ग्राम प्रधान के खेत में मिलने से सनसनी फैल गई। बालक का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला था। बच्चे के दादा ने उसके कपड़ों से उसकी पहचान की। बच्चे के गले में काला गमछा मिला जिससे उसका गला कसकर मारा गया था। बच्चे की लाश प्लास्टिक के खाद की बोरी में भरकर फेंका गया था। मौके पर बोरे को घसीटने के निशान भी मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि बच्चे की कहीं और हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के इरादे से खेत में फेंका गया था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिवार और आसपास के लोगों से पूछताछ की। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। सात साल में मासूम की हत्या की सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह भी मौके पर पहुंचे थे।
आपको बता दें कि बालक अंशू तीन बहनों में इकलौता भाई था और सबसे बड़ा था। वह गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाई कर रहा था। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन वह उस समय रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था, जब परिवार की महिलाएं शिव मंदिर पर जल चढ़ाने गई और अंशु घर के बाहर खेल रहा था तो उसे छोड़ गई थीं। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया है। जानकारी के अनुसार धनारी पट्टी बालू शंकर गांव के रोहित का सात वर्षीय पुत्र अंशू 15 फरवरी की सुबह 11 बजे घर के बाहर खेल रहा था। महाशिवरात्रि का दिन था और परिवार की महिलाएं मंदिर में शिवजी को जल चढ़ाने जा रही थी। अंशु बाहर खेल रहा था तो उसे वहीं छोड़कर चली गईं। महिलाएं मंदिर से लौटी तो बच्चे की तलाश हुई। काफी तलाश के बाद भी जब उसका पता नही चला तो परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई।
इसी बीच गुरूवार की दोपहर 12 बजे ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह के गेहूं के खेत में काम कर रहे रामनगर उर्फ कनुआ नगला निवासी प्रेम सिंह की पीले रंग के खाद के प्लास्टिक के बोरे पर पड़ी। पास जाकर देखा तो उसमें लाश थी। शव का चेहरा बोरे से बाहर निकला हुआ था। यह देख उसके रांंगटे खड़े हो गये। वह शोर मचाने लगा। उसकी सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान को सूचित किया तो पुलिस को सूचना दी गई। कुछ देर के बाद थाना प्रभारी फोर्स के साथ पहुंचे। आला अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दी गई। शव लगभग सड़ चुका था और उसमें से दुर्गंध आ रही थी। इससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया था। पुलिस ने गुमशुदगी की दर्ज रिपोर्ट के आधार पर मृतक के दादा चंद्रपाल को बुलाया तो उन्होंने पोते अंशु के रूप में उसकी पहचान की। गले में काला गमछा बंधा था और चेहरे से खाल गायब थी। इससे आशका जताई जा रही है कि हत्यारों ने उसकी पहचान न हो सके इसलिए चेहरे को किसी ज्वलनशील पदार्थ से झुलसा दिया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डॉग स्क्वायड बुलाया गया। जासूसी कुतिया मौके से गंध लेने के बाद कुछ दूर तक जाने के बाद रूक गई। इस मामले में मृतक अंशु के दादा चंद्रपाल ने तीन लोगों पर हत्या का संदेह जताया है। पुलिस ने उनकी तलाश की तो पता चला कि तीनों फरार हैं। इसलिए पुलिस को उन पर शक गहरा गया है। पुलिस घर से एक किमी के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है।