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सफेदपोश, नौकरशाही और माफियाओं की तिकड़ी का नतीजा है करोड़ों का कफ सिरप कांड 

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने उठाए सवाल, STF के एएसपी लाल प्रताप सिंह के ट्रांसफर की मांग

 

बिहार के मंत्री की भूमिका की जांच की मांग कर चुके हैं ठाकुर, जौनपुर के हैं पूर्व सांसद, अमित सिंह टाटा और STF के एडिश्नल SP 

जौनपुर के बाहुबली पूर्व सांसद और बर्खास्त सिपाही के खिलाफ हजरतगंज में दर्ज है धारा 307, 504 के तहत FIR

वाराणसी, भदैनी मिरर। जानलेवा कोडीनयुक्त कफ सिरप कांड में सफेदपोशों और माफियाओं की संलिप्तता की सत्यता सामने आने लगी है। पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने पूर्वांचल के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को यूपी पुलिस पर बचाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने इस मामले में बिहार के एक मंत्री की भूमिका की जांच की मांग भी कर दी है। अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी सहित संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर इन मामलों की गंभीरता से जांच के साथ ही एसटीएफ एडिशनल एसपी लाल प्रताप सिंह का तत्काल ट्रांसफर किए जाने की मांग की है। इसका मतलब पुलिस अधिकारी भी इस मामले में संलिप्त है, जो माफिया सरगनाओं और सफेदपोशों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। चर्चा तो यह भी है कि इस संगीन मामले में सफेदपोशों की संलिप्तता है और उन्होंने अपने को बचाने के लिए अपने ‘पालतू‘ अधिकारियों को जांच के काम में लगा दिया है। कारोड़ों के कफ सिरप तस्करी कांड में सफेदपोशों, माफियाओं और नौकरशाहों की तिकड़ी शामिल है। जानकारों का कहना है कि जांच में लगे ‘पालतू‘ अधिकारियों से निष्पक्ष  जांच की उम्मीद करना बेमानी है।

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गौरतलब है कि कप सिरप कांड के मास्टरमाइंड और दुबई में परिवार समेत छिपे बैठे शुभम जायसवाल के सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर के साथ तस्वीरें वायरल हुई थी। यह अलग बात है कि ओमप्रकाश राजभर ने ‘हम नेता लोग है‘ और हमसे हर तरह के लोग मिलते रहते हैं, कहकर अपना बचाव किया। लेकिन इस घटना के तार सत्ताधारियों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल उठने लाजमी हैं। इधर, अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों को भेजे गये पत्र में कहा है कि कफ सिरप मामले में एसटीएफ द्वारा अब तक जिस प्रकार से कार्यवाही हो रही है, वह पूरी तरह सवालों के घेरे में है। इनमें मुख्य आरोपित शुभम जायसवाल के दुबई भागने और अमित सिंह टाटा की गिरफ्तारी के समय से जुड़े सवाल शामिल हैं। इसके साथ ही बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह की गिरफ्तारी के समय दिए गए प्रेस नोट में जहां आशियाना और सुशांत गोल्फ सिटी के दो मुकदमे दिखाए गए थे, वहीं थाना हजरतगंज में दर्ज एफआईआर संख्या 387/2019 धारा 307, 504 आईपीसी का उल्लेख नहीं किया गया है। इस मुकदमे में आलोक प्रताप सिंह के साथ पूर्व सांसद धनंजय सिंह का भी नाम है, जिन पर एक व्यक्ति को ठेकेदारी के मामले में धमकी देने और गोली मरवाने के आरोप हैं।

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अमिताभ ठाकुर ने कहा कि इतने गंभीर मामले का उल्लेख नहीं किया जाना स्पष्टतया अनुचित है। आलोक प्रताप सिंह का एसटीएफ द्वारा रिमांड नहीं प्राप्त किया जा पाना भी इस दिशा में एक और प्रमाण दिखता है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में जौनपुर के मूल निवासी लाल प्रताप सिंह की विशेष भूमिका बताई जा रही है। उन्होंने डीजीपी से लाल प्रताप सिंह का तत्काल ट्रांसफर करने औरा अपने पत्र में अंकित तथ्यों की जांच और कार्रवाई की मांग की है। अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र के साथ थाना हजरतगंज लखनऊ में दर्ज एफआईआर की प्रति, जिसमें आलोक प्रताप सिंह और धनंजय सिंह दोनों आरोपित है की प्रति भी भेज दी है। 

गौरतलब है कि दो दिन पहले ही अमिताभ ठाकुर ने बिहार के एक मंत्री की भूमिका की जांच की मांग की थी। बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह के पूर्व सांसद धनंजय सिंह के सम्बंधों की चर्चा वर्षों से है। लेकिन इस घटना के बाद यह चर्चा आम हो गई। आलोक प्रताप सिंह के लखनऊ वाले मकान समेत तमाम प्रापर्टियों की जांच की मांग भी उठ रही है। साथ ही कफ सिरप कांड में पूर्वांचल के ही एक और माफिया सरगना का भी नाम सामने आ रहा है। लेकिन वर्तमान में सत्ता का सबसे करीबी होने के कारण उसे भी बचाने की पूरी कोशिश हो रही है। इस मामले में गिरफ्तार अमित सिंह टाटा के इन दोनों माफिया सरगनाओं से सम्बंध रहे। या यह कह लें कि बाहुबली पूर्व सांसद और माफिया डॉन से राजनीति में आये इस सरगना से सम्बंध हैं। यह सर्व विदित है कि धनंजय सिंह पर इसी योगी सरकार में ऐसा शिकंजा कसा गया था कि उन्हें भूमिगत होना पड़ा था।  पिछले चुनाव में धनंजय की पत्नी की पर्चा वापसी क्यों हुई, यह बात भी किसी से छिपी नही है। जब वह ‘सत्ता शरणम गच्छामि‘ हुए तो जान बची।

सूत्र बताते हैं कि कफ सिरप कांड के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और सुभासपा नेता ओपी राजभर के सम्बंध तो चर्चा में हैं, लेकिन ओपी राजभर और सीएम योगी आदित्यनाथ के सम्बंध भी बहुत अच्छे नही बताए जाते हैं। जानकारों की मानेंं तो ओपी राजभर का सीधे  अमित शाह से सम्बंध है जिसके कारण योगी विरोधी होने के बावजूद सत्ता में कैबिनेट मंत्री बने हुए हैं। इन विरोधाभास का नतीजा ही है कि एक तरफ कफ सिरप कांड के आरोपितों पर कभी शिकंजा कसा जा रहा है तो कभी ढील भी दी जा रही है। आपको बता दें कि इस मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक बनारस में बयान दे चुके हैं की इसमें किसी आरोपित को नही बख्शा जायेगा। लेकिन इस कांड की जांच में इसका उल्टा असर दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों अमित सिंह टाटा को एसटीएफ ने जब गिरफ्तार किया तो वह इसी बर्खास्त सिपाही के साथ उज्जैन के महाकाल के दर्शन करने गया था। इसके बाद ही अमित टाटा और आलोक पकड़े गये थे। चर्चा है कि बाहुबली पूर्व सांसद के दबाव में इसी एसटीएफ ने आलोक प्रताप को तब छोड़ दिया  था। अब दबाव बना तो आलोक की गिरफ्तारी दिखाई गई। इस कांड ऐसे कई सवाल है जो सत्ताधारियों और माफियाओं की कलई खोल रहे हैं। इन तमाम आरोपों के बावजूद पर्दे के पीछे से प्रभावशाली लोग कफ सिरप तस्करी कांड को दबाने की जुगत में लगे हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जायेगा।