प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर ही खड़ा कर दिया सवाल, मेल क्षेत्र में हमेशा के लिए प्रतिबंध की दी चेतावनी
मौनी अमावस्या पर पालकी के साथ संगम स्नान जाते समय नोकझोंक के बाद गरमाया सियासी माहौल
प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण और शंकराचार्य के वकील ने एक-दूसरे पर लगाया सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप
शंकराचार्य ने योगी सरकार पर लगाया था गंभीर आरोप, विपक्ष भी ‘सनातन‘ को लेकर हुआ हमलावर
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेला 2026 में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मुद्दा गरमाता ही जा रहा है। मौनी अमावस्या के दिन पालकी के साथ संगम नोज तक स्नान के लिए जाने से रोकने के बाद से तकरार बढ़ती ही जा रही है। एक और शंकरचार्य ने योगी सरकार पर ही उनकी हत्या की साजिश का गंभीर आरोप लगाया और शासन, प्रशासन पर सवाल खड़े किये। वहीं प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने उन्हें दो नोटिसें जारी कर दी है। यही नही मामला इतने गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है कि प्रशासन उनके शंकराचार्य होने या लिखने पर ही सवाल खड़े कर रहा है। यहां तक कि प्रशासन ने उन्हें दी जा रही सभी सरकारी सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी दी है। साथ ही भविष्य में माघ मेले में उनके प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगाने तक की बात कही है। शंकराचार्य के वकील की ओर से पहली नोटिस का जवाब भी दिया गया है। अव्वल तो यह कि प्रशासन और शंकराचार्य पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की बात कही है। इससे लगने लगा है कि अब यह मामला न्यायालय की दहलीज पर एक बार फिर जानेवाला है। दोनों पक्ष कदम पीछे करने को तैयार नही है। वैसे जानकारों का कहना है कि माघ मेला विवाद तो तत्कालीन मामला है, असली खेल कहीं और से हो रहा है।
गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम नोज तक पालकी से जाने को लेकर जिद पर अड़ गये थे। करीब तीन घंटे तक प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुयायियों के बीच नोकझोंक हुई। पुलिस अधिकारी उन्हें पैदल संगम नोज तक जाने का अनुरोध करते रहे। लेकिन शंकराचार्य लगातार पालकी से जाने की जिद पर अड़े रहे। इस दौरान शंकराचार्य समर्थकों ने बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास किया। बाद में प्रशासन से नाराजगी जाहिर करते हुए शंकराचार्य बगैर स्नान किये अपने शिविर में लौट गये। इसके बाद में ही माहौल गरमा गया है। इस मामले को लेकर प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले भी प्राधिकरण ने उनके शंकराचार्य लिखे जाने के मसले पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब प्राधिकरण की ओर से शंकराचार्य को 18 जनवरी को दूसरी नोटिस भेजी गई है। कहा गया है कि मौनी आमावरया पर्व पर आपात परिस्थितियों में उपयोग में लाए जाने वाले पांटून पुल नंबर 2 पर लगे बैरियर को तोड़ा गया। संगम अपर मार्ग से बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बग्घी पर सवार होकर आप भीड़ के साथ जा रहे थे। मेला पुलिस एवं प्रशासन की ओर से संगम क्षेत्र में किसी प्रकार के वाहन न ले जाने की घोषणा बार-बार ध्यनि विस्तारक यंत्र और वायरलेस सेट से की जा रही थी। उस समय स्नानार्थियों की अत्यतिक भीड़ थी तथा केवल पैदल आवागमन की अनुमति दी गई थी।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि यह क्षेत्र स्नानार्थियों के आवागमन एवं सुरक्षा की दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील था। आपके स्तर पर बग्घी पर सवार होकर जाने के कारण मेला पुलिस और प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आपने वाहन निषिद्ध क्षेत्र संगम नोज तक अपनी बग्घी लेकर जाने का प्रयास किया। उस समय वहां लाखों की संख्या में स्नानार्थी स्नान कर रहे थे। मना किए जाने पर आपके स्तर पर विवाद की स्थिति उत्पन्न की गयी। आपके इस प्रकार प्रवेश से भगदड़ होने और उससे प्रबल जनहानि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। आपके इस कृत्य से मौनी आमावस्या पर माघ मेला की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई और स्नान के लिए आ रहे लाखों स्नानार्थियों को सुरक्षित स्नान कराकर उन्हें वापस भेजने में दिक्कत हुई। मेला में आए लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। इसके साथ ही अपने खुद को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड आदि लगाए हैं। जबकि आधिकारिक रूप से आपके शंकराचार्य होने पर सुप्रीम कोर्ट से रोक है। आपका यह कार्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है। नोटिस में कहा गया है कि तमाम स्थितियों को देखते हुए आपको सूचित किया जाता है कि कृपया 24 घंटे के अंदर यह स्पष्ट करें कि आपके उक्त कृत्य के कारण आपकी संस्था को दी गई भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित क्यों नहीं कर दिया जाय। अगर निर्धारित अवधि में आपका उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो यह मानते हुए कि इस सम्बन्ध में आपको कुछ नहीं कहना है, इसके आधार पर निर्णय पारित कर दिया जाएगा।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 18 जनवरी को प्रशासन की ओर से भजी गई नोटिस अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह नोटिस श्री शंकराचार्य आश्रम शाकंभरी पीठ, सहारनपुर और बद्रिका आश्रम हिमालय सेवा शिविर, मनकामेश्वर मंदिर के शिविर संचालकों के नाम पर जारी किया गया है। आपको बता दें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं मेलाधिकारी ऋषिराज की ओर से जारी पहली नोटिस का जवाब दे दिया गया है। शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिये गये आठ पेज के जवाब में प्रशासन से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने की मांग की गई है। कहा गया है कि शंकराचार्य का पट्टाभिषेक पहले ही संपन्न हो चुका था। जबकि प्रशासन की ओर से संदर्भित आदेश बाद के समय का है। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने सहित अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। इधर, शंकराचार्य के खिलाफ प्रशासन खड़ा दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल शंकराचार्य के पक्ष में सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता शंकराचार्य से परिचय पत्र मांगने आदि सवालों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि शंकराचार्य से परिचय पत्र मांगना या उनके साथ प्रशासन का आचरण सनातन का अपमान है। वहीं इसके साथ ही सरकारी और गैर सरकारी संतों को लेकर भी विवाद छिड़ गया है। यह मामला दिनोदिन पेचीदा होता जा रहा है।