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मणिकर्णिका घाट पर वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित मंदिर ढहाये जाने के खिलाफ आप ने मुख्यालय पर किया प्रदर्शन

विकास के नाम पर सन् 1771 में स्थापित मंदिर और मूर्ति को बुलडोजर से ढहाने के खिलाफ फूटा गुस्सा

 

राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा, कहा-काशी की विरासत और पहचान को ढहाने की जुर्रत न करे भाजपा सरकार

वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी के प्राचीन मठ, मंदिरों और शिलालेखों को केंद्र सरकार और भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ध्वस्तीकरण कराए जाने के विरुद्ध आम आदमी पार्टी शनिवार को बनारस की सड़कों पर उतरी। जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे और काशी के प्राचीन मंदिरों और शिलालेखों को ध्वस्त किये जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया। जिलाध्यक्ष श्री कैलाश पटेल के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से प्रेषित किया गया।

इस दौराान वक्ताओं ने कहाकि संपूर्ण भारत में मठ, मंदिरों की सुरक्षा और हिंदुत्व का नारा देने वाली भारत की केंद्र सरकार और भाजपा प्रधानमंत्री द्वारा विकास के नाम पर मणिकर्णिका घाट के बगल में वीरांगना अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित मंहिरी और प्राचीन मंदिर ध्वस्त किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी इसका मुखर बिरोध करती है। वीरांगना अहिल्याबाई होलकर के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सन् 2025 में चांदी का सिक्का जारी किया था। अब वही मोदी के संसदीय क्षेत्र में बुलडोजर लगाकर अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को तोड़कर जमींदोज कर दिया गया। सन् 1771 में वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर ने जिन मंदिरों का निर्माण कराया था, आज उन्ही मंदिरों को तोड़ कर विकास का नाम दिया जा रहा है। दुनिया के सभी देश अपनी प्राचीन विरासत को बचाकर जीर्णाेद्धार करके सुरक्षित रखते हैं।

देश-विदेश से भारत आनेवाले प्राचीर विरासतों और प्राकृतिक सौंदर्य को देखना उनका एक मात्र उद्देश्य होता है। काशी की जनता का कहना है कि हम बनारस के लोग इन्हीं मंदिरों, घाटों पर पले बढ़े और अपना जीवन बिताया है। आज केंद्र की भाजया सरकार विरासतों को मिटाकर हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है। आम आदमी पार्टी की वाराणसी इकाई राष्ट्रपति में मांग करती है कि केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर द्वारा सन 1771 में स्थापित प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया गया है। तत्काल उसका जीर्णाेद्धार कराया जाय। विकास के नाम पर काशी की विरासत और उसकी पहचान को मिटाने का काम बंद करें।