वाराणसी में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर बनाई और चलाई गई थी टेंट सिटी
NGT ने ट्रिब्यूनल ने प्रवेग कम्युनिकेशन, निरान द टेंट सिटी को दोषी ठहराया, 17 लाख जुर्माने को 3 माह में वसूलने का दिया निर्देश
15 जनवरी से 31 मई 2023 तक किया गया था संचालन, अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने दाखिल की थी याचिका
वाराणसी, भदैनी मिरर। वाराणसी जिला प्रशासन की कथित महात्वाकांक्षी योजना के तहत गंगा किनारे वर्ष 2023 में स्थापित टेंट सिटी पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर बनाई और चलाई गई थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पाया कि इससे गंगा प्रदूषण और जीव-जंतुओं को नुकसान हुआ। ट्रिब्यूनल ने प्रवेग कम्युनिकेशन और निरान द टेंट सिटी को दोषी ठहराते हुए यूपीपीसीबी द्वारा लगाए गए लगभग 17 लाख रुपये के जुर्माने को तीन माह में वसूलने का निर्देश दिया है।
एनजीटी ने गुरुवार को गंगा पार रेत पर बसाये गये टेंट सिटी के मामले में एक याचिका पर सुनवाई की। इसमें आरोप लगाया गया था कि यह टेंट सिटी बिना किसी मंजूरी के बनाई गई और इसके कारण गंगा का प्रदूषण बढ़ा है। साथ ही इससे पेड़-पौधों और जीवों को भी नुकसान पहुंचा।
एनजीटी की बेंच के चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल ने अपनी फाइंडिंग में कहा कि प्रतिवादी प्रवेग कम्युनिकेशन इंडिया लिमिटेड और निरान द टेंट सिटी ने पर्यावरण नियमों और गंगा (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरणों के आदेशों का उल्लंघन करते हुए टेंट सिटी स्थापित की थी। एनजीटी ने यह भी नोट किया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने नवंबर 2023 में टेंट सिटी के संचालन के लिए लगभग 17 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था। यह ग्रीन नियमों के उल्लंघन के कारण था। ट्रिब्यूनल ने यूपीपीसीबी और उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण विभाग को निर्देश दिया कि वे तीन माह के भीतर जुर्माना वसूल करें। साथ ही सम्बंधित राज्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि गंगा या उसकी सहायक नदियों के किनारे ऐसी किसी भी टेंट सिटी की अनुमति न दी जाय। आपको बता दें कि वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने गंगा पार रेत पर टेंट सिटी के लिए दो कंपनियों के साथ अनुबंध किया था। इसे बारिश के दिनों के अलावा अन्य महीनों में इसके संचालन की योजना बनाई गई थी। उस समय प्रशासनिक स्तर में इसे महात्वाकांक्षी योजना और इससे कई फायदे बताते हुए खूब प्रचारित किया और कराया था।
गौरतलब है कि काशी के चेतसिंह घाट के सामने टेंट सिटी की बसाई गई थी। इसके बाद टेंट सिटी के जरिए गंगा में मलजल जाने और अन्य पर्यावरणीय क्षति को लेकर सवाल उठने लगे थे। इस मामले में याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता वकील सौरभ तिवारी ने पर्यावरणीय उल्लंघनों का दावा करते हुए याचिका दाखिल की। एनजीटी ने आरोपों की पुष्टि के लिए मार्च 2023 में एक सात सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया। इसके बाद समिति ने कई पर्यावरणीय उल्लंघनों का खुलासा किया, जिसके बाद संबंधित कंपनियों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। टेंट सिटी का संचालन 15 जनवरी से 31 मई 2023 तक किया गया था। एनजीटी में मामला लंबित रहने के कारण शासन ने अगले वर्ष टेंट सिटी की स्थापना से हाथ खींच लिए थे।