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आखिरकार लखनऊ पहुंच ही गये स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का हुआ औपचारिक शंखनाद

तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए लिया गया 4.5 लाख रुपये शुल्क, लगाये गये 26 प्रतिबंध

 

माघ मेले में अपमान के बाद ही शंकराचार्य ने योगी सरकार के खिलाफ कर दिया था जंग का एलान

आशियाना के कांशीराम उपवन में हो रहा जनजागरण अभियान

लखनऊ। तमाम प्रतिबंधों और दबावों के बावजूद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गोहत्या पर प्रतिबंध समेत विभिन्न मांगों के साथ आखिरकार मंगलवार की रात लखनऊ पहुंच गये। मुख्य कार्यक्रम गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का आगाज हो गया। जनजागरण अभियान आशियाना के कांशीराम उपवन में हो रहा है। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने जितने प्रतिबंध लगाये हैं उसे देखकर तो यही लगता है कि सत्ताधारी योगी सरकार संकुचित दायरे में ही समेटने के चक्कर में लगी हुई है। अब जारा प्रतिबंधों की बात करें तो पुलिस अधिकारियों व एलडीए स्मारक प्रबंध समिति के सदस्यों ने 26 शर्तों के साथ उनके कार्यक्रम को अनुमति ही है। इसमें धर्म, जाति, संप्रदाय व भाषा के विरुद्ध भड़काऊ भाषण नहीं होगा। किसी राजनीतिक/धार्मिक व्यक्ति पर अमर्यादित या विद्वेषपूर्ण भाषा नहीं होगी जैसी शर्तें शामिल हैं। इनके उल्लंघन पर परमिशन स्वतः रद होने की बात कही गई है।

फिर भी 11 मार्च को शीतला अष्टमी के अवसर पर आशियाना के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा पर दोपहर 2ः15 बजे से शाम पांच बजे तक कार्यक्रम का आगाज हो गया। लखनऊ शहर पहुंचते ही उन्होंने हनुमान मंदिर पहुंचकर दर्शन कर बजरंगबली का आशीर्वाद लिया। इसके बाद कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। हालांकि भारी भीड़ की आशंका के चलते खुफिया एजेंसियां पहले से ही सक्रिय है। इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थाने की पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। आयोजन स्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। आपको बता दें कि इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए आयोजकों की ओर से करीब 4.5 लाख रुपये का शुल्क स्मारक समिति में जमा कराया गया है। आपको बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद काशी से गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शुभारम्भ किया। इसके बाद जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज, उन्नाव और नैमिषारण्य में सभाएं करते हुए लखनऊ पहुंचे।

प्रतिबंधों की फेहरिश्त : जुलूस या शोभायात्रा की अनुमति नही, कोविड प्रोटोकाल के अलावा बहुत कुछ

लखनऊ में अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम को अनुमति के साथ एलडीए स्मारक समिति और पुलिस ने 26 शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में यह शामिल हैं कि धर्म, जाति, संप्रदाय व भाषा के विरुद्ध भड़काऊ भाषण नहीं होगा। किसी राजनीतिक/धार्मिक व्यक्ति पर अमर्यादित या विद्वेषपूर्ण भाषा नहीं होगी। नाबालिग बच्चों से विवादित नारे नहीं लगवाए जाएंगे। सीमित संख्या में वाहनों का प्रवेश, यातायात बाधित नहीं करेंगे। पारंपरिक ध्वजदंड के अलावा घातक वस्तु का प्रयोग नहीं होगा। मांगों का ज्ञापन सक्षम अधिकारी को सौंपा जाएगा। किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। कार्यक्रम के लिए तैनात पुलिस बल का भुगतान आयोजक को करना होगा। शांत क्षेत्र में ढोल, संगीत और लाउडस्पीकर प्रतिबंधित रहेंगे। यातायात और अग्निशमन विभाग के निर्देशों का पालन अनिवार्य है। आवश्यक विभागीय अनुमति आयोजक स्वयं प्राप्त करेंगे। सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर वाहन पार्किंग नहीं होगी। ध्वनि प्रदूषण नियम-2000 के मानकों का पालन होगा। नियम उल्लंघन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दंडनीय अन्य आवश्यक अनुमति/लाइसेंस से छूट नहीं होगी। पुलिस द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा (अधिकतम 75 डेसीबल) से अधिक नहीं होगा। आतिशबाजी, हथियार व हर्ष फायरिंग पूर्णतः प्रतिबंधित है। पंडाल की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होगी। पर्याप्त निजी सुरक्षाकर्मी लगाए जाएंगे, अव्यवस्था नहीं होगी। सांप्रदायिक/जातीय टिप्पणी या उत्तेजक बयान नहीं होगा। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि प्रसारण बंद रहेगा। स्थान किराया व अन्य शुल्क आयोजक स्वयं देंगे। कोविड-19 गाइडलाइन का पालन होगा। जुलूस या शोभायात्रा की अनुमति नहीं होगी। इनमें से किसी शर्त का उल्लंघन हुआ तो अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।

शंकराचार्य की अपील-जो लखनऊ नहीं पहुंच पाए वे अपने-अपने शहरों से ही करेंग शंखनाद

गौरतलब है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच 36 का आंकड़ा जगजाहिर है। माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान से रोके जाने और अपमानजनक व्यवहार के बाद शंकराचार्य ने शासन और प्रशासन के खिलाफ जंग ही छेड़ दिया। इसके बाद से ही शंकराचार्य के कार्यक्रमों और उनकी गतिविधियों की पल-पल की घटनाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इधर, लखनऊ पहुंचना ही उनके लिए आसान नही था, फिर भी वह पहुंच गये। लेकिन प्रशासनिक शिकंजे को देखते हुए शंकराचार्य ने अनुयायियों से की अपील की है। उन्होंने कहाकि अनुमति देर से मिलने के कारण बहुत से लोग नही पहुंच पाए। उन्होंने कहाकि जो लोग लखनऊ नहीं पहुंच पाएंगे, वे अपने-अपने शहरों या गांवों में ही गो रक्षा के लिए शंखनाद करें। प्रशासन ने सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए 26 सख्त शर्तों के साथ अनुमति दी है। आपको बता दें कि शंकराचार्य ने 7 मार्च को वाराणसी से अपनी ’गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू की थी। इस दौरान जगह-जगह सभा में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम की मियाद पूरी हो गई है। लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए आज लखनऊ में धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जा रहा है। यहां असली और नकली हिंद का मुद्दा भी उठाया जाएगा।