हाईकोर्ट का सख्त आदेश: यूपी में तय होंगे ध्वनि प्रदूषण के मानक, अवैध हूटर और प्रेशर हॉर्न पर लगेगी रोक
आवासीय, व्यावसायिक और साइलेंस जोन का होगा वर्गीकरण; बिक्री, स्थापना और उपयोग रोकने के लिए सरकार को 3 महीने का अल्टीमेटम
लखनऊ। सड़कों पर वाहनों से फैलने वाले तेज शोर, अवैध हूटर और प्रेशर हॉर्न के बढ़ते चलन के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों को सख्ती से लागू करने और इसके लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत तय डेसिबल मानकों को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेशभर में क्षेत्रों का वर्गीकरण किया जाना अनिवार्य है।
औद्योगिक,व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों का होगा वर्गीकरण
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने एक स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ध्वनि प्रदूषण के मानकों को प्रभावी बनाने के लिए यह जरूरी है कि राज्य के सभी इलाकों को औद्योगिक, व्यावसायिक, आवासीय और शांत (साइलेंस) जोन के रूप में वर्गीकृत किया जाए। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यदि अब तक क्षेत्रों का ऐसा वर्गीकरण नहीं किया गया है, तो अगले 3 महीनों के भीतर इसकी पहचान कर इसकी अधिसूचना तत्काल जारी की जाए।
प्रेशर हॉर्न और हूटरों के अनाधिकृत उपयोग पर चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने वाहनों में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे प्रेशर हॉर्न और हूटरों पर गहरी चिंता जताई। पीठ ने कहा कि वाहनों में प्रेशर हॉर्न का उपयोग पहले से ही प्रतिबंधित है, इसके बावजूद इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में सरकार को इनकी बिक्री, वाहनों में इनकी फिटिंग (स्थापना) और उपयोग पर तुरंत और प्रभावी रोक लगानी चाहिए ताकि आम जनता को ध्वनि प्रदूषण से राहत मिल सके।
इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 15 जनवरी 2027 को तय की गई है, जिसमें सरकार को उठाए गए कदमों की रिपोर्ट पेश करनी होगी।