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संभल में मस्जिद पर बुलडोजर ऐक्शन पर भड़के सांसद जियाउर्रहमान बर्क, बोले- 'सड़क से संसद और कोर्ट तक लड़ेंगे लड़ाई'

'मस्जिद-मदरसों को टारगेट कर रही भाजपा सरकार'

 

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में कथित अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का बुलडोजर ऐक्शन लगातार जारी है। इसी कड़ी में कसेरूवा गांव में एक मस्जिद को ढाए जाने के बाद क्षेत्र में सियासी पारा गरमा गया है। इस कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के स्थानीय सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

सांसद बर्क ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और बिना नोटिस दिए पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि भाजपा जानबूझकर धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही है।

"मस्जिद-मदरसों और कब्रिस्तानों को बनाया जा रहा निशाना"

प्रेस वार्ता के दौरान सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर एक तय एजेंडे के तहत यह कार्रवाई की है।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "भाजपा सरकार नीति के तहत मुस्लिम समाज को बांटने का प्रयास कर रही है, लेकिन जनता उनके इस मंसूबे को कामयाब नहीं होने देगी। जब-जब चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा मस्जिद, मदरसों और कब्रिस्तानों को टारगेट करना शुरू कर देती है।" सांसद ने आगे भावुक होते हुए कहा कि इस कार्रवाई के बाद पूरे गांव में मायूसी और गम का माहौल है।

सड़क से संसद और सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी लड़ाई

सपा सांसद ने कसेरूवा गांव की इस कार्रवाई को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया। उनका दावा है कि ध्वस्त की गई मस्जिद लगभग 150 वर्ष पुरानी है और वक्फ बोर्ड (Waqf Board) में विधिवत पंजीकृत है। ऐसी स्थिति में तहसील प्रशासन को इस पर सीधे निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं था।

अदालती कार्रवाई पर उठाए सवाल: सांसद ने बताया कि यह मामला तीन बार जिलाधिकारी न्यायालय (DM Court) में पहुंचा। दो बार सुनवाई नहीं हो सकी और तीसरी बार में बिना ग्रामीणों के अधिवक्ता को सुने ही फैसला सुना दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि देर रात बैक डेट में आदेश तैयार कर आनन-फानन में ध्वस्तीकरण की टीम भेज दी गई। बर्क ने स्पष्ट किया कि वे इस नाइंसाफी के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों के संपर्क में हैं और जिम्मेदार अधिकारियों को न्यायालय में घसीटेंगे।

हरे झंडे और धार्मिक पोस्टरों पर दी प्रतिक्रिया

मस्जिद के मलबे से धार्मिक पोस्टर्स और हरे झंडे मिलने की चर्चाओं पर भी सांसद बर्क ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अल्लाह और उनके रसूल से मोहब्बत करता है, इसलिए धार्मिक स्थलों पर ऐसे पोस्टर होना स्वाभाविक है।

वहीं, हरे झंडे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हरा रंग इस्लाम का एक पवित्र प्रतीक है और मुस्लिम समुदाय ईद मिलादुन्नबी जैसे त्योहारों पर इसका इस्तेमाल करता है। इस बात को बेवजह तूल देकर मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

जनता से संयम बरतने की अपील

कानूनी लड़ाई का भरोसा देते हुए सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने स्थानीय जनता और ग्रामीणों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन से लड़ाई लाठी-डंडे से नहीं, बल्कि पूरी ताकत के साथ कानून के दायरे में रहकर लड़ी जाएगी। संविधान का अनुच्छेद-25 हर नागरिक को अपने धार्मिक स्थलों की रक्षा का अधिकार देता है और इसी के तहत वे अदालत से न्याय लेकर आएंगे।