यूपी में बड़ा पोंजी घोटाला: 18% रिटर्न का लालच देकर 50 हजार लोगों से 80 करोड़ की ठगी
ममता अंजलि सर्विस सॉल्यूशन पर शिकंजा; बकरियां, गहने और खेत गिरवी रखकर पैसा लगाने वाले हजारों परिवार तबाही के कगार पर, भदैनी मिरर की विशेष रिपोर्ट।
गाजीपुर / वाराणसी (भदैनी मिरर): उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र से निवेश के नाम पर एक बहुत बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। गाजीपुर जिले में 'ममता अंजलि सर्विस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी ने हर महीने 18 फीसदी रिटर्न और कम समय में रकम कई गुना करने का लालच देकर करीब 50 हजार से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया। निवेशकों से लगभग 80 करोड़ रुपये जुटाने के बाद कंपनी के सभी दफ्तर रातों-रात बंद हो गए और अधिकारी फरार हो गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर कंपनी के सीएमडी संतोष यादव समेत चार वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।
ऐसे हुआ एफआईआर दर्ज
सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह के अनुसार, गाजीपुर घाट रेलवे स्टेशन निवासी सिब्बू कुमार सिंह की तहरीर पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर निम्नलिखित चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है:
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संतोष यादव (कंपनी के सीएमडी)
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सुनीता यादव (निदेशक)
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ममता सूद (सीओ)
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राहुल सूद
पीड़ित के अनुसार, 'जय श्री प्रजापति' और 'श्रवण कुमार बिंद' के माध्यम से वे कंपनी के अधिकारियों से संपर्क में आए थे। पुलिस ने बीएनएस (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और 'अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम' (Banning of Unregulated Deposit Schemes Act) के तहत मामला दर्ज कर जांच निरीक्षक नागेंद्र प्रसाद सिंह को सौंपी है।
तेजाब, हमसफर और सारथी जैसी योजनाओं का मायाजाल
शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंपनी ने बेहद आकर्षक और अजीबोगरीब नाम वाली योजनाएं चला रखी थीं:
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छोटा तेजाब योजना: ₹1.25 लाख लगाने पर 18 महीने में ₹18 लाख देने का दावा।
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बड़ा तेजाब योजना: ₹6.25 लाख के निवेश पर 40 लाख रुपये देने का भरोसा।
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हमसफर योजना: ₹1.25 लाख के निवेश पर प्रतिमाह ₹23,500 का फिक्स्ड रिटर्न।
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सारथी योजना: 6 महीने में 10 ग्राम सोना और 36 महीने बाद ₹10 लाख देने का लालच।
इसके अलावा बच्चों को साइकिल, छात्रवृत्ति और लैपटॉप देने के वादे भी किए जाते थे।
6 साल में गांव-गांव फैलाया जाल, मऊ-बलिया तक एजेंट
कंपनी का परिचालन साल 2020 में शुरू हुआ था। कोरोना काल के बाद बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के बीच लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई इसमें लगानी शुरू कर दी।
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कासिमाबाद क्षेत्र: 10 हजार से अधिक सदस्य और 25 मुख्य लीडर।
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मुहम्मदाबाद क्षेत्र: करीब 100 टॉप लीडर और 40 हजार एजेंट/सदस्य।
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अन्य जिले: आधिकारिक कार्यालय न होते हुए भी मऊ, बलिया और वाराणसी के चौबेपुर (मुनारी) तक नेटवर्क फैलाया गया।
निवेशकों को शुरू में 3500, 5500 और 12500 रुपये की आईडी से जोड़ा जाता था, जिसके बाद उन्हें बड़ी योजनाओं में फंसाया जाता था।
मई 2026 से बंद हुआ भुगतान, दफ्तरों पर जड़े ताले
शुरुआत के 1-2 महीनों तक निवेशकों को रिटर्न दिया गया ताकि उनका विश्वास जीता जा सके, लेकिन मई 2026 के बाद से सभी भुगतान पूरी तरह रोक दिए गए। जब परेशान निवेशक गाजीपुर, मुहम्मदाबाद, कासिमाबाद और मुनारी स्थित दफ्तरों पर पहुंचे, तो वहां ताले लटके मिले।
8 सितंबर को जब निवेशक सीएमडी संतोष यादव के जौनपुर स्थित पैतृक आवास पहुंचे, तो वहां उन्हें धमकाकर भगा दिया गया और बाद में सभी आरोपियों के मोबाइल फोन बंद हो गए।
दर्दनाक केस स्टडीज: तबाही के कगार पर परिवार
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केस 1 (बकरियां बेचकर लगाया पैसा): बारापुर गांव के एक गरीब किसान ने निवेश की रकम जुटाने के लिए अपनी बकरियां तक बेच दीं। वहीं कटया गांव के एक व्यक्ति ने दुकान खोलने के लिए जमा किए गए पैसों को तेजाब योजना में गंवा दिया।
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केस 2 (पत्नी के गहने बेचे और खेत गिरवी रखे): शहाबुद्दीनपुर, डिहवा और वासुदेवपुर के कई ग्रामीणों ने अपनी पत्नियों के सोने के आभूषण बेच दिए। कई लोगों ने केसीसी (KCC), स्वयं सहायता समूहों और साहूकारों से भारी ब्याज पर कर्ज लेकर निवेश किया था।
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केस 3 (बेटियों की शादी के पैसे फंसे): मुहम्मदाबाद और गाजीपुर की दो महिलाओं ने आगामी नवंबर और दिसंबर में होने वाली अपनी बेटियों की शादी के लिए 'हमसफर योजना' में जमा पूंजी लगा दी थी। अब शादी के ठीक पहले पैसा डूबने से परिवारों में कोहराम मचा है।
पुलिस की कार्रवाई और खाते सीज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। पुलिस ने कंपनी के 9 बैंक खातों को सीज करने के निर्देश जारी किए हैं, साथ ही कासिमाबाद क्षेत्र से जुड़े लगभग 2700 खातों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की संपत्तियों की कुर्की और निवेशकों के पैसों की वसूली के लिए कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।