{"vars":{"id": "125128:4947"}}

मौनी अमावस्या पर योगी सरकार मेरी हत्या कराना चाहती थी-स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

चापलूस संतों से घिरे हैं योगी आदित्यनाथ, मुझे पालकी से उतारने का प्रयास साजिश थी

 

मौनी अमावस्या पर शोभायात्रा संग संगम स्नान जाने से रोके जाने पर प्रशासन से हुआ था विवाद

दुर्व्यवहार से नाराज होकर बिना स्नान किये लौट गये थे शिविर, शिष्यों से अभद्रता का आरोप

प्रयागराज। ज्योषि पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मौनी अमावस्या पर मेरी हत्या कराना चाहती थी। योगी चापलूस संतों को पसंद कर रहे हैं और उन पर पालकी से उतरने का दबाव इसीलिए बनाया जा रहा था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंडलायुक्त व गृह सचिव को दोषी ठहराया है। इसके अलावा वह संगम में शोभायात्रा के साथ स्नान करने से रोके जाने पर मेला प्रशासन के खिलाफ अन्न-जल त्यागकर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने अपने अपमान और शिष्यों के साथ पुलिस की अभद्रता पर गहरी नाराजगी जताई है।

उधर,  अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर स्नान से रोके जाने के मामले को लेकर उनके समर्थकों और भक्तों में रोष है। उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में शंकराचार्य के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं और यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौन उपवास पर बैठ गए हैं। वहीं, हरिद्वार स्थित शंकराचार्य मठ में श्री अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में राम नाम जप किया जा रहा है। आपको बता दें कि ज्योतिर्मठ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख मठों में से एक है।

इस प्रकरण से आक्रोशित लोगों ने जोशीमठ के श्रीराम चौराहे पर उत्तर प्रदेश सरकार का पुतला फूंका और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि यूपी सरकार ने इस मामले में कठोर और स्पष्ट कार्रवाई नहीं की, तो उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सनातन धर्म और संत समाज का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।