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नेहा सिंह राठौर का नया गीत: लोकगायिका ने गाने के जरिए सरकार की नीतियों पर किया तीखा प्रहार

भोजपुरी गीत में बेरोजगारी, निजीकरण, पर्यावरण, स्वास्थ्य व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे मुद्दों को उठाया, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
 

 

लखनऊ, भदैनी मिरर। लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने एक बार फिर अपने गीतों के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। करीब 2 मिनट 53 सेकंड के इस नए भोजपुरी गीत में उन्होंने बेरोजगारी, निजीकरण, पर्यावरण संकट, स्वास्थ्य व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे कई संवेदनशील मुद्दों को उठाया है।

नेहा सिंह राठौर का यह गीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक व सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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गीत के जरिए जन असंतोष की अभिव्यक्ति

गीत में यह संदेश दिया गया है कि देश की जनता भय में है, लेकिन यह डर किसी धर्म विशेष से नहीं बल्कि जनविरोधी नीतियों से जुड़ा है। गीत के बोलों में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा नीतियां आम लोगों के भविष्य को उद्योगपतियों के हित में दांव पर लगा रही हैं।
गीत में पेंशन व्यवस्था, स्थायी नौकरियों की कमी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, स्कूलों के बंद होने, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, पर्यावरण विनाश, प्रदूषित हवा और जहरीले पानी जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है।


भोजपुरी बोलों में सरकार पर कटाक्ष

गीत के भोजपुरी बोलों में प्रतीकात्मक भाषा के जरिए सत्ता पर कटाक्ष किया गया है। धार्मिक प्रतीकों, विकास के दावों और सत्ता की छवि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। गीत में यह भी कहा गया है कि अगर मौजूदा हालात को विकास कहा जा रहा है, तो फिर विनाश किसे कहा जाएगा।

 पानी, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य का मुद्दा

गीत में हाल के उन मामलों की ओर भी संकेत किया गया है, जहां दूषित पानी के कारण लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं। इसके साथ ही जंगलों की कटाई, पर्यावरण को होने वाले नुकसान और मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति

गीत के एक हिस्से में सामाजिक कार्यकर्ता **सोनम वांगचुक** का संदर्भ भी आता है, जिन्हें लद्दाख से जुड़े आंदोलन के बाद हिरासत में लिए जाने का मामला चर्चा में रहा है। गीत में इसे असहमति की आवाज़ों के दमन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

सोशल मीडिया पर तेज प्रतिक्रिया

नेहा सिंह राठौर का यह गीत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। समर्थक इसे जनभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक एजेंडा करार दे रहे हैं।