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'मुसलमानों ने सपा नेताओं को दिया लव लेटर': 5 सूत्रीय मांगों को लेकर गरमाई राजनीति, जानें क्या हैं 4 प्रमुख मांगें

आजमगढ़ में शिवपाल और धर्मेंद्र यादव को सौंपा ज्ञापन; मुस्लिम दलित आरक्षण, 'अरजाल आयोग' और कर्पूरी फॉर्मूले की उठाई मांग

 

भदैनी मिरर डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम समाज की राजनीतिक और सामाजिक हिस्सेदारी को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव और आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव को मुस्लिम प्रतिनिधियों द्वारा 5 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसे उन्होंने 'मुसलमानों की तरफ से समाजवादी पार्टी को दिया गया लव लेटर' करार दिया।

ज्ञापन देने पहुँचे प्रतिनिधियों का कहना है कि मुस्लिम समाज लंबे समय से एकमुश्त वोट देकर समाजवादी पार्टी को मजबूत बनाता रहा है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक हिस्सेदारी के मामले में उन्हें अक्सर दरकिनार कर दिया जाता है।

वोट बैंक की राजनीति पर सवाल, 13 जातियों को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

प्रतिनिधियों ने समाजवादी पार्टी के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए कहा कि भटियारा, डफाली, गधेड़ी, फकीर, जोगी, रंगरेज़, मोची, मुस्लिम बढ़ई, मुस्लिम माली और मुस्लिम कोरी जैसी लगभग 13 अति-पिछड़ी मुस्लिम जातियाँ हैं, जिन्हें आजादी के 80 सालों बाद भी कोई उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। न तो इनका कोई सांसद बना, न विधायक, न MLC और न ही कोई नगर अध्यक्ष।

उन्होंने कहा कि "जब वोट देने की बात आती है तो हम झोला भर-भरकर वोट, सपोर्ट और फंड देते हैं, लेकिन जब हक और अधिकार की बात आती है तो केवल 'अल्पसंख्यक' कहकर मामले को टाल दिया जाता है।"

धार्मिक प्रतिबंध हटाने और 'अरजाल आयोग' के गठन की मांग

मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने देश भर में गाजीपुर से गाजियाबाद तक चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी एक पार्टी से नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक न्याय के लिए है।

ज्ञापन में रखी गईं 4 मुख्य मांगें:

  1. संविधान की धारा 341 (3) से धार्मिक प्रतिबंध हटाना:

    10 अगस्त 1950 को लागू प्रेसिडेंशियल ऑर्डर (धारा 341) से धार्मिक प्रतिबंध हटाया जाए ताकि मुस्लिम और ईसाई दलित जातियों को भी अनुसूचित जाति (SC) का अधिकार मिल सके। Representatives का कहना है कि काम के आधार पर समानता होनी चाहिए—जैसे हिंदू धोबी/नट को SC का दर्जा है, वैसे ही मुस्लिम धोबी/नट को भी समान अधिकार मिले।

  2. 'अरजाल आयोग' का गठन:

    मुस्लिम दलित जातियों के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक समर्पित 'अरजाल आयोग' का गठन किया जाए।

  3. छूटी हुई जातियों को OBC सूची में शामिल करना:

    उत्तर प्रदेश की OBC सूची से छूटी हुई मुस्लिम जातियों, जैसे मुस्लिम पवरिया/पमरिया और अन्य को तत्काल उत्तर प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में शामिल किया जाए।

  4. बिहार की तर्ज पर 'कर्पूरी फॉर्मूला' लागू करना:

    उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27% आरक्षण के भीतर अति-पिछड़ों और अति-पिछड़े मुसलमानों के लिए बिहार की तर्ज पर कर्पूरी ठाकुर फॉर्मूला (Extremely Backward Class categorization) लागू किया जाए।

'जो फंडामेंटल राइट्स की बात करेगा, वही राज करेगा'

आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि चाहे NDA गठबंधन हो या INDIA गठबंधन, जो भी दल मुस्लिम समाज के बुनियादी, संवैधानिक और मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) की बात करेगा और उनकी इन चार प्रमुख मांगों का समर्थन करेगा, मुस्लिम समाज उसी के साथ खड़ा होगा।

सपा महासचिव शिवपाल यादव और सांसद धर्मेंद्र यादव ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए सकारात्मक वार्ता का आश्वासन दिया है।