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छात्र को 5 लाख का नोटिस देने वाले मजिस्ट्रेट निलंबित, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र को प्रदर्शन में शामिल होने पर मिला था नोटिस; सीजेआई सूर्यकांत की पीठ के कड़े रुख के बाद कार्रवाई

 

नई दिल्ली / भदैनी मिरर: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन में साथी छात्रों को शामिल करने के आरोप में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख रुपये के मुचलके का नोटिस थमाने वाले ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी।

यह मामला छात्र अक्षत त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। छात्र ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 135 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें 6 महीने के लिए 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदार पेश करने का आदेश दिया गया था।

सीजेआई सूर्यकांत के कड़े रुख के बाद कार्रवाई

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष जब वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. दिनेश ने मामले का उल्लेख किया, तो अदालत ने इस पर बेहद गंभीर रुख अपनाया और राज्य सरकार से जवाब तलब किया। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए संबंधित मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया।

एक दिन की मोहलत और प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन

याचिका में कहा गया कि ईको फर्स्ट पुलिस थाने के सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट पर 4 सितंबर को नोटिस जारी किया गया और छात्र को 5 सितंबर को ही पेश होने का निर्देश दिया गया। इतने कम समय में वकील से सलाह लेने और जमानतदार जुटाने की मोहलत न देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क), 19(1)(ख) और अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता का यह भी तर्क है कि यह कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के उस आदेश के सीधे विपरीत थी, जिसमें छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी। मजिस्ट्रेट के निलंबन के बाद अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर सभी की निगाहें टिकी हैं।