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महोबा में जल जीवन मिशन का लीकेज मिला : टंकी में पानी भरते ही फट गया, गुणवत्ता पर सवाल

जल जीवन मिशन की गड़बड़ियों के लिए ही चरखारी विधायक ने जलशक्ति मंत्री का काफिला रोका था

 

ग्रामीणों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, विधायक ने की लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

जैतपुर ब्लॉक के नागराडांग गांव में 65 लाख रुपये की लागत से बनी थी पानी की टंकी

महोबा। जिस महोबा में पिछले दिनों जल जीवन मिशन की बदहाली और भ्रष्टाचार से नाराज होकर भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने प्रदेश सरकार के अपनी ही पार्टी के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह का काफिला रोक लिया था। दोनों पक्षों में बहस भी हुई, अब उसी महोबा के जैतपुर ब्लॉक के नागराडांग गांव में जल जीवन मिशन की कलई खुल गई। यहां 65 लाख रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी पानी भरते ही फट गई। इससे हजारों लीटर पानी बर्बाद हो गया। इस मामले में भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग की है। घटना की जानकारी के बाद पहुंचे अधिकारी अब जांच और मरम्मत कराने का आश्वासन दे रहे हैं। लेकिन जनता खासा नाराज है।

आपको बता दें कि योजना की बदहाली और भ्रष्टाचार को लेकर लोग पहले से ही खासे नाराज थे। घर-घर नल योजना के तहत लोगों के घरों तक कनेक्शन पहुंचाया गया लेकिन कई जगह पानी की टंकी ही गायब थी। जिले में करीब 900 करोड़ की लागत से जल जीवन मिशन योजना का काम कराया जा रहा है। पहली योजना 2024 में पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया है। कई गांवों में पानी की पाइप लाइन तो डाल दी गई लेकिन वहां पानी नहीं पहुंचा। कई गांवों में पाइपलाइन डालते समय खोदी गई सड़कों की मरम्मत भी नहीं हुई है। इसके बावजूद वहां के अधिकारी सबकुछ ठीक बता रहे हैं। गौरतलब है कि 30 जनवरी को चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने समर्थक प्रधानों को लेकर मंत्री स्वतंत्रदेव का रास्ता रोक लिया था और जल जीवन मिशन की कमियां गिनाई थीं। इसे लेकर खूब राजनीतिक बयानबाजी हुई थी। इस मामले में भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से विधायक को नोटिस भी जारी कर दी गई। 

आपको बता दें कि इस टंकी का निर्माण लगभग 65 लाख रुपये की लागत से कार्यदायी संस्था द्वारा कराया गया था। यह ’धवर्रा सिजवाहा ग्राम समूह पेयजल योजना’ का हिस्सा है, जिसकी कुल लागत ₹261.51 करोड़ बताई गई है। टंकी का निर्माण 2025 में पूरा हुआ था और 13 फरवरी को इसमें पानी भरने का काम शुरू किया गया। अगले ही दिन, 14 फरवरी को टंकी की दीवारों में दरारें पड़ गईं और हजारों लीटर पानी बहने लगा। ग्राम प्रधान गायत्री और अन्य ग्रामीणों ने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी, जिससे वह पानी का दबाव नहीं झेल सकी। एडीएम नमामि गंगे मोइनुल इस्लाम ने बताया कि मौके पर टीम भेजी गई है और टंकी को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है।

एडीएम नमामि गंगे मोइनुल इस्लाम ने घटना के बाद सम्बंधित कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टंकी के फटने की तकनीकी वजहों की जांच की जा रही है। संस्था को इसे अपने खर्च पर पुनर्निर्मित या दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही कार्यदायी संस्था का शेष भुगतान जांच पूरी होने तक रोक दिया गया है। विभाग द्वारा एक विशेष तकनीकी जांच टीम गठित की गई है जो निर्माण में उपयोग की गई सामग्री (सीमेंट, सरिया और कंक्रीट का अनुपात) की गुणवत्ता की जांच कर रही है। अब इस मामले को लेकर विपक्ष हमलावर हो रहा है। वह इसी बहाने जलशक्ति मंत्री को घेरने की तैयारी में है। चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने इस मामले को शासन स्तर पर उठाया है और लापरवाह अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई जैसे ब्लैकलिस्ट करना या एफआईआर की मांग की है।