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Jhansi Gunner Murder: झांसी के बहुचर्चित गनर मर्डर केस में 8 दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 1-1 लाख का जुर्माना

Jhansi Gunner Murder Case: झांसी के बहुचर्चित गनर मर्डर केस में 8 को उम्रकैद, 22 साल की दुश्मनी में कोर्ट का बड़ा फैसला

 

झांसी (भदैनी मिरर डेस्क): उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बहुचर्चित गनर जय गोस्वामी हत्याकांड और जमीन कारोबारी संजय वर्मा पर हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शनिवार को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट अनुभव द्विवेदी की अदालत ने इस मामले में 8 आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अलावा, जानलेवा हमले (धारा 307) के तहत सभी को 10-10 साल की अतिरिक्त सजा और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। वहीं, मामले के अन्य 8 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।

21 जुलाई 2018 को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी थी कचहरी

शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पंचाल और देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि मामला 21 जुलाई 2018 का है। जमीन कारोबारी संजय वर्मा कोर्ट की तारीख निपटाकर अपने निजी सुरक्षा कर्मी (गनर) जय गोस्वामी, साथी सुनील कुशवाहा और चालक रवि वर्मा के साथ कार से लौट रहे थे।

तभी बस स्टैंड मार्ग पर पुस्तकालय भवन के पास घात लगाकर बैठे बाइक सवार बदमाशों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी थी। इस खौफनाक गोलीकांड में गनर जय गोस्वामी के शरीर में 11 गोलियां लगी थीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में संजय वर्मा को एक, सुनील कुशवाहा को तीन और चालक रवि को दो गोलियां लगी थीं, जो गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद नवाबाद थाने में कुल 16 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।

इन 8 आरोपियों को हुई उम्रकैद, ये हुए बरी

करीब 7 साल 10 महीने चली लंबी कानूनी लड़ाई, बहस और 21 गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया:

इन्हें मिली उम्रकैद की सजा:

  1. सोनू गैंडा

  2. रिंकू गैंडा

  3. बोबी गैंडा

  4. राजेंद्र गुर्जर

  5. प्रहलाद गुर्जर

  6. उधम गुर्जर

  7. भूपेंद्र गुर्जर

  8. कमलेश यादव

साक्ष्य के अभाव में ये हुए बरी:

मुख्य आरोपी सरदार सिंह गुर्जर, राव राजा, भरत सिंह, सनम डागर, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, नीतेश पटवारी और रोहित उर्फ रोहताश को कोर्ट ने बरी कर दिया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि वारदात के समय मुख्य आरोपी सरदार सिंह जेल में था, जिसे अभियोजन पक्ष झूठा साबित करने के लिए पुख्ता सबूत नहीं दे सका।

वर्चस्व की खूनी जंग: 22 साल की दुश्मनी में अब तक 3 मौतें

इस पूरे विवाद के पीछे वर्चस्व और जमीनी रंजिश की एक लंबी खूनी दास्तान है। सूत्रों के मुताबिक, लकारा के रहने वाले सरदार सिंह गुर्जर और जमीन कारोबारी संजय वर्मा के बीच करीब 22 साल पहले दुश्मनी शुरू हुई थी।

  • साल 2004: सरदार सिंह गुर्जर के भतीजे चंद्रशेखर गुर्जर की हत्या हुई, जिसका आरोप संजय वर्मा पर लगा।

  • साल 2006: ठीक दो साल बाद, संजय वर्मा के भाई और सराफा कारोबारी अजय वर्मा की दुकान में घुसकर हत्या कर दी गई, जिसमें सरदार सिंह गुर्जर और उसके साथी आरोपी बने।

  • साल 2018: संजय वर्मा पर दोबारा जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उनके गनर जय गोस्वामी की जान चली गई।

वैज्ञानिक साक्ष्यों ने बिगाड़ा खेल

सुनवाई के दौरान आरोपियों ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की थी कि वे घटना के वक्त झांसी में मौजूद ही नहीं थे, बल्कि अन्य राज्यों या शहरों में थे। लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए पुख्ता सीडीआर (CDR), सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने साबित कर दिया कि वारदात के समय सभी आरोपी झांसी में ही मौजूद थे, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया।