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“अरे! भाग क्यों रहे हैं?” शंकराचार्य विवाद पर प्रयागराज में पत्रकारों के सवालों से घिरे अधिकारी, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मचा हंगामा

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रोटोकॉल न मिलने के मुद्दे पर प्रशासन का दावा—सुप्रीम कोर्ट आदेश का पालन, बीच प्रेसवार्ता छोड़कर जाने पर पत्रकारों ने रोका

 

प्रयागराज। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े मामले को लेकर सोमवार को प्रयागराज में प्रशासन और पत्रकारों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। शंकराचार्य के आरोपों के जवाब में बुलाई गई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय हंगामे में बदल गई, जब अधिकारी बयान देकर पत्रकारों के सवालों से बचते हुए बीच में ही बाहर निकलने लगे।

मेला प्राधिकरण कार्यालय के सभागार में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज मौजूद थे। अधिकारियों ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश के अनुसार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य का कोई विशेष प्रोटोकॉल देने का प्रावधान नहीं है।

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि संगम तट पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण शंकराचार्य को आगे जाने से रोका गया था। उन्हें रथ से उतरकर स्नान करने का आग्रह किया गया, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। यदि वे घाट तक जाते तो अफरातफरी की स्थिति बन सकती थी।

डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि यदि प्रशासन कोई विशेष सुविधा देता तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होती। वहीं मेलाधिकारी ऋषिराज ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को न तो कभी शंकराचार्य के रूप में प्रोटोकॉल मिला है और न ही माघ मेले में शिविर आवंटित किया गया।

पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि तीन घंटे तक दबाव बनाया गया कि पैदल नहीं जाएंगे, जिससे जद्दोजहद की स्थिति बनी। अफरातफरी से बचने के लिए कुछ लोगों को अलग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने किसी को पीटा नहीं है और पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए किसी को वीआईपी स्नान की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इस बीच, जब प्रेस वार्ता के दौरान अधिकारी मीडिया के सवालों के बीच उठकर जाने लगे, तो पत्रकारों ने कड़ा विरोध जताया।

“अरे! भाग क्यों रहे हैं? जवाब दीजिए” — जैसे तीखे सवालों के साथ पत्रकारों ने अधिकारियों को रोक लिया। हंगामा बढ़ता देख अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा और सवालों के जवाब देने को मजबूर हुए।

हालांकि, पत्रकारों के तीखे सवालों पर अधिकारी जांच कराने की बात कहकर कई मुद्दों पर पल्ला झाड़ते नजर आए। यह पूरा घटनाक्रम यूपी में पत्रकारों की एकजुटता, सवाल पूछने की हिम्मत और प्रेस की भूमिका को दर्शाता है।