फिरोजाबाद का नरपिशाच बाप : घर में 12 साल के बेटे को हसिया से दौड़ा-दौड़ाकर काटा, बक्से में लाश बंद कर भागा
फर्श, सीढ़ियों और दीवारों पर पड़े खून के छींटे दे रहे थे हैवानियत की गवाही
पति-पत्नी में लम्बे समय से कलह और सम्पत्ति के विवाद में पिता अपनी ही औलाद की जान का बना दुश्मन
दोपहर बाद लौटी मां तो उसे हुआ संदेह, पुलिस आई तो खुला सनसनीखेज मामला
फिरोजाबाद। फिरोजाबाद के मोहल्ला जिजौली में सोमवार को एक बाप ने हैवानियत और क्रूरता की सारी हदें पार कर दी। उसकी हैवानियत सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गये। इस नरपिशाच बाप राजेश कुमार राजपूत ने कक्षा पांच में पढ़नेवाले महज 12 साल के मासूम बेटे को पूरे घर में दौड़ा-दौड़ाकर हसिये से काटा। घर में अकेले बेटे ने अपनी जान बचाने के लिए तमाम कोशिशें की लेकिन उसे काट ही डाला। पूरे घर की दीवारों पर पड़़े खून के छींटे इस हैवान बाप के करतूत की कहानी कह रहे थे। यही नही उसने बच्चे की हत्या के बाद उसके क्षत-विक्षत लाश को बक्से में रखकर ताला बंद कर दिया। अपना महापाप छिपाने के लिए उसने फर्श से लेकर तमाम जगह के खून साफ किये। हसिया और खून साफ करनेवाले बोरे को बगल के खाली प्लाट में फेंक दिया था। दोपहर बाद जब पत्नी घर आई तो बच्चा लापता था। खोजबीन के दौरान दीवार पर खून के छींटों ने संदेह पैदा कर दिया। पुलिस आई तो इस नरपिशाच की बेटे को तड़पा-तड़पा कर मारने की करतूत उजागर हुई। फिलहाल हत्या के बाद राजेश राजपूत फरार है और पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। इस पिता की करतूत जब सुनकर आसपास के लोगों के अलावा पुलिस वाले भी दंग रह गये। सबके जेहन में एक ही सवाल कि क्या कोई पिता अपनी ही औलाद के साथ ऐसी क्रूर हरकत कर सकता है?
राजेश कुमार राजपूत की पत्नी उर्मिला देवी निजी स्कूल में टीचर है। दोनों से दो बच्चे 16 वर्षीया बेटी महिमा और 12 वर्षीय बेटा मयंक राजपूत थे। पति-पत्नी के बीच लम्बे समय से घरेलू कलह चल रहा था और संपत्ति विवाद था। इस कलह और विवाद इतना खतरनाक मोड़ ले लिया कि मासूम बेटे मयंक की बेरहमी से मौत के रूप में सामने आई। राजेश की बेटी महिला ननिहाल गई थी। सुबह पत्नी उर्मिला स्कूल चली गई। बेटा मयंक और पिता राजेश घर में थे। दम्पती में विवाद इतना गहरा हो गया था कि पिता ने अपने बेटे को ही मारने की योजना बना ली। सोमवार की सुबह उर्मिला स्कूल चली गई। घर में बेटा अकेले था। पिता उसकी हत्या की तैयारी कर रहा था। तब तक बेटी महिमा ननिहाल से घर आ गई। कुछ देर के बाद बेटी महिमा ट्यूशन पढ़ने चली गई। तब राजेश ने हसिया से बेटे पर वार करना शुरू किया। बेटा कभी कमरों में तो कभी सीढ़ियों से छत की ओर जान बचाने के लिए भागता रहा और यह नरपिशाच उसकी जान लेने के लिए उसे पीछे दौड़ता रहा। जहां-जहां इस बाप ने बेटे पर हसिया से हमला किया, वहां-वहां खून गिरा। दीवारों पर खून के छींटे पड़ते रहे और यह बाप हैवानियत की हदें पार करता रहा। साफ सफाई के बावजूद दीवारों और जगह-जगह फर्श पर खून के छींटे उसकी क्रूरता और मासूम के जिंदगी बचाने की जद्दोजहद की कहानी बयां कर रहे थे। दोपहर बाद तीन बजे उर्मिला घर पहुंची। मयंक लापता था। उसने तलाश की लेकिन पता नही चला। जब उसने सीढ़ियों और दीवार पर पड़े खून के छींटे को देखा तो उसे शंका हो गई। सूचना पर पुलिस आई। पुलिस को भी कहीं मयंक नही मिला। पुलिस ने खून के छींटों के सहारे उसकी तलाश की। इसके बाद किचन में गई तो वहां बक्से में ताला बंद मिला। उसे पानी से धोया गया था। पुलिस ने बक्सा खोलवाया तो उसे खून से लथपथ मयंक का शव मिला। हालांकि हत्यारा बाप भाग चुका था।
पुलिस ने मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर बताया कि मासूम मयंक ने मौत से पहले काफी संघर्ष किया था। पिता ने हंसिए से हमला किया तो वह अपनी जान बचाने के लिए कमरे, रसोई और सीढ़ियों पर इधर-उधर भागा। इसके कारण पूरे घर की दीवारों और फर्श पर खून के छींटे फैल गए। पुलिस के अनुसार राजेश कुमार ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। वह सोमवार को फैक्टरी में काम पर नहीं गया। सुबह उसकी बेटी महिमा ननिहाल से वापस आ गई थी। इससे राजेश की योजना में थोड़ी बाधा आई लेकिन उसने तब तक इंतजार किया जब तक महिमा दोपहर 2 बजे ट्यूशन नहीं चली गई। आखिरकार मौका पाकर उसने बेटे की हत्या कर दी। उसने जिस हसिया से हत्या की और जिस बोरे से जगह-जगह के खून साफ किये थे, उसे पास के खाली प्लाट में फेंक दिया था। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हसिया और बोरा बरामद कर लिया है। पुलिस ने बच्चे के मामा की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।