वसूली व लूट केस: ₹25 हजार के इनामी निलंबित थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश ने किया आत्मसमर्पण, SIT कर रही पूछताछ
एसआईटी ने 40 मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लिया; वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज में लगातार दबिश, फरार आरोपियों की तलाश तेज।
जौनपुर
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जबरन वसूली और लूट के गंभीर मामलों में महीनों से फरार चल रहे निलंबित थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह ने आखिरकार सोमवार को आत्मसमर्पण कर दिया। उनके खिलाफ पुलिस ने ₹25 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। आत्मसमर्पण के तुरंत बाद विशेष जांच टीम (SIT) ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया है और मामले की परतें खोलने के लिए पूछताछ शुरू कर दी है।
तीन जिलों में छापेमारी और 40 नंबर सर्विलांस पर
जौनपुर के जलालपुर और सुरेरी थाना क्षेत्रों में दर्ज मुकदमों की जांच कर रही एसआईटी के अनुसार, दिव्य प्रकाश सिंह और अन्य सह-आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज में लगातार पुलिस टीमों द्वारा दबिश दी जा रही थी। पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते आरोपी निलंबित थानाध्यक्ष ने सरेंडर कर दिया।
एसआईटी अब इस पूरे सिंडिकेट और घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों की गहनता से पड़ताल कर रही है। इस मामले में जांच टीम ने लगभग 40 मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया है, जिससे आरोपियों के आपसी कनेक्शन, कॉल डिटेल्स और लोकेशन की कड़ी जोड़ी जा रही है।
जेल में बंद आरोपियों से 3 घंटे चली पूछताछ
मामले की तह तक पहुंचने के लिए एसआईटी की टीम ने बीते शुक्रवार को जेल पहुंचकर पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से करीब तीन घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी।
टीम ने आत्मसमर्पण करने वाले केराकत कोतवाली क्षेत्र के पहाड़ी पट्टी निवासी संकीत और उसके भाई विकास सिंह से भी आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों भाइयों ने इस लूट व वसूली कांड में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। जांच में यह भी सामने आया है कि इन दोनों का सीधा संपर्क सुरेरी थाना क्षेत्र के देहुआ निवासी राज नारायण गिरी से था, जो ग्राहक सेवा केंद्र से जुड़ा हुआ था।
ग्राहक सेवा केंद्र और पुलिसकर्मियों की मिलीभगत
जांच में खुलासा हुआ है कि राज नारायण गिरी सुरेरी में एक ग्राहक सेवा केंद्र संचालित करवाता था, जिसे कबीरुद्दीनपुर निवासी मनीष पटेल संभालता था। इस नेटवर्क के जरिए पैसों के अवैध लेन-देन और वसूली को अंजाम दिया जाता था। राज नारायण गिरी पर भी ₹25 हजार का इनाम घोषित है।
गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस की साख पर बड़े सवाल उठे थे, जिसके बाद निलंबित आरक्षी सत्येंद्र कुमार गौड़ और आरक्षी विष्णु सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
निलंबित थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह के आत्मसमर्पण के बाद अब एसआईटी की प्राथमिकता नेटवर्क में शामिल अन्य सफेदपोशों और फरार आरोपियों तक पहुंचना है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सर्विलांस डेटा और आरोपी से पूछताछ में मिलने वाले इनपुट के आधार पर जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। तीनों जिलों में पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।