UP Electricity Bill Hike: अप्रैल में 2.14% बढ़ेगा बिजली बिल, उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा असर
ईंधन अधिभार शुल्क लागू होने से बढ़ेगा बिल, हर ₹1000 पर ₹21.4 अतिरिक्त वसूली; स्मार्ट प्रीपेड मीटर से भी उपभोक्ता परेशान
उत्तर प्रदेश, भदैनी मिरर। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अप्रैल का महीना महंगा साबित होने वाला है। पावर कॉर्पोरेशन ने ईंधन अधिभार शुल्क (Fuel Surcharge) की नई दरें तय कर दी हैं, जिसके चलते अप्रैल में बिजली बिल में 2.14 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी का बिजली बिल ₹1000 आता है, तो उसे करीब ₹21.4 अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
मार्च में राहत, अप्रैल में फिर बढ़ा बोझ
मार्च महीने में ईंधन अधिभार शुल्क की दरें नेगेटिव में थीं, जिससे उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन अप्रैल में दरें फिर से पॉजिटिव होने के कारण अतिरिक्त वसूली की जाएगी।
पावर कॉर्पोरेशन के अनुसार, इस अधिभार के जरिए अप्रैल में उपभोक्ताओं से करीब ₹142 करोड़ की वसूली का अनुमान है।
फॉर्मूले पर उठे सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने अधिभार शुल्क की गणना के फॉर्मूले पर सवाल उठाए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि पूरे साल में ज्यादातर महीनों में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है, यहां तक कि सर्दियों में भी।
उन्होंने मांग की है कि इस फॉर्मूले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उपभोक्ताओं से की जा रही अतिरिक्त वसूली को रोका जाए।
बकाया रकम का मुद्दा भी गरमाया
उपभोक्ता परिषद का यह भी कहना है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब ₹51 हजार करोड़ बकाया है। ऐसे में पहले इस रकम का समायोजन किया जाना चाहिए, न कि उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली की जाए।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बढ़ी परेशानी
प्रदेश में लागू स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली भी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
- बैलेंस खत्म होते ही तुरंत बिजली कट जा रही है
- भुगतान के बाद भी समय पर कनेक्शन बहाल नहीं हो रहा
- सर्वर और डेटा अपडेट में देरी की समस्या
उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें बार-बार बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि अधिकारी तकनीकी कारणों का हवाला देकर समस्या टाल रहे हैं।
क्या कह रहे हैं अधिकारी?
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई बार सर्वर या डेटा अपडेट में देरी के कारण भुगतान की सूचना समय पर नहीं मिल पाती, जिससे बिजली बहाली में विलंब होता है। हालांकि, सूचना मिलते ही कनेक्शन बहाल करने का दावा किया गया है।
आम लोगों पर दोहरी मार
एक ओर बिजली बिल में बढ़ोतरी और दूसरी ओर स्मार्ट मीटर की समस्याएं—इन दोनों कारणों से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।