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CAT: 'WhatsApp पर वरिष्ठ अधिकारी का OK लिखना छुट्टी की आधिकारिक मंजूरी नहीं'

सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना व्हाट्सएप संदेश को नहीं माना जा सकता निर्णायक सबूत; रेलवे कर्मचारी की याचिका खारिज

 

लीगल/नेशनल डेस्क (भदैनी मिरर): सरकारी और प्रशासनिक सेवाओं में छुट्टियों की औपचारिक प्रक्रिया को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), इलाहाबाद ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ज्यूडिशियल मेंबर रजनीश कुमार राय की पीठ ने स्पष्ट कहा है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा WhatsApp पर केवल 'OK' लिख देना, अपने आप में सक्षम प्राधिकारी द्वारा छुट्टी मंजूर किए जाने का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अधिकरण ने यह टिप्पणी उत्तर मध्य रेलवे (North Central Railway) के एक कर्मचारी की उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें उसने प्रयागराज से फतेहपुर किए गए अपने स्थानांतरण (Transfer) को चुनौती दी थी।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता उत्तर मध्य रेलवे में चीफ कमर्शियल सुपरवाइजर/कमर्शियल मैनेजमेंट इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत था। उसने 14 से 16 जुलाई, 2025 तक तीन दिन की छुट्टी ली थी। इसके बाद 16 जुलाई को उसने WhatsApp के जरिए 17 और 18 जुलाई के लिए दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी मांगी।

कर्मचारी का दावा था कि सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर (कोचिंग) ने उसके संदेश पर 'OK' लिखकर जवाब दिया था। हालांकि, ड्यूटी पर वापस लौटने के बाद रेलवे ने उसका तबादला प्रयागराज से फतेहपुर कर दिया, जिसे कर्मचारी ने दंडात्मक कार्रवाई बताते हुए CAT में चुनौती दी थी।

रेलवे ने अदालत में क्या दलील दी?

रेलवे की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए बताया गया कि:

  1. सक्षम अधिकारी की अनुपस्थिति: संबंधित सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर (कोचिंग) 14 से 25 जुलाई तक ट्रेनिंग पर थे। उस दौरान वाणिज्य विभाग का प्रशासनिक कार्यभार सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर (फ्रेट) अतुल यादव के पास था, जो छुट्टी मंजूर करने के लिए वास्तविक सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) थे।

  2. HRMS पोर्टल नियम: नियमानुसार छुट्टी का आवेदन HRMS पोर्टल के माध्यम से स्वीकृत होना अनिवार्य था। महज मैसेज पर 'OK' लिखना अधिकृत मंजूरी नहीं है।

CAT का फैसला: ट्रांसफर को नहीं माना दंडात्मक कार्रवाई

मामले की सुनवाई करते हुए CAT इलाहाबाद ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किए:

  • WhatsApp संदेश अमान्य: अधिकरण ने पाया कि जब संबंधित अवधि में छुट्टी मंजूर करने का अधिकार दूसरे अधिकारी के पास था, तो व्हाट्सएप पर मिले 'OK' को अंतिम और वैध स्वीकृति नहीं माना जा सकता।

  • प्रशासनिक जरूरत के तहत ट्रांसफर: फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर नए प्रवेश व बुकिंग कार्यालय के विकास, कर्मचारियों की आवश्यकता और पद की उपलब्धता को देखते हुए यह ट्रांसफर किया गया था। कर्मचारी 2019 से मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कार्यालय में तैनात था।

  • दुर्भावना का अभाव: प्लेसमेंट कमेटी की सिफारिश और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद आदेश जारी हुआ था। ठोस सबूतों के अभाव में इसे दुर्भावनापूर्ण या छिपे हुए दंड के रूप में नहीं देखा जा सकता।

तथ्यों और नियमों का अवलोकन करने के बाद अधिकरण ने माना कि कर्मचारी वैधानिक नियमों के उल्लंघन या दुर्भावना को साबित करने में विफल रहा, जिसके आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी गई।