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यूपी के बाहर गैर भाजपा शासित राज्य में हो शंकराचार्य के खिलाफ मुकदमे की जांच-स्वामी प्रकाशानंद

आवाहन अखाड़े के महामंडलेश्वर खुलकर आये शंकराचार्य के समर्थन में 

 

क्या संतों को अपनी बात रखने के लिए भी ’सफेदपोशों’ और ’खाकी’ के डर से गुजरना होगा?

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उठाया था सवाल, कहा-इस स्तर पर उतर आई योगी सरकार, 20 साल पुराना मामला उठा ले आई

मुम्बई। माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर पालकी से जाकर संगम स्नान से रोके जाने, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपमानजनक व्यवहार और बटुकों की चुटियां खींचने का मामला गहराता ही जा रहा है। अपमान से क्षुब्ध ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के नेतृत्व वाली यूपी सरकार को निशाने पर ले लिया तो अब शंकराचार्य के खिलाफ भी पेशबंदी शुरू हो गई है। पक्ष और विपक्ष से समर्थन, विरोध के सुर भी सुनाई दे रहे हैं। इसी बीच अब प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आवाहन अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद महाराज अब खुलकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने कई गंभीर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहाकि शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच उत्तर प्रदेश से बाहर किसी ऐसे राज्य में कराई जाए जहां भाजपा की सरकार न हो।
स्वामी प्रकाशानंद महाराज को अंदेशा है कि यूपी पुलिस के दबाव में होने के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। संत समाज का मानना है कि धर्म और न्याय के मामले में राजनीति का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। शंकराचार्य और योगी आदित्यनाथ के बीच चल रहे टकराव के दौर में अब संत समाज में सवाल उठने लगे हैं। पूछा जा रहा है कि क्या आज के समय में संतों को अपनी बात रखने के लिए भी ’सफेदपोशों’ और ’खाकी’ के डर से गुजरना होगा? अगर मामला धर्म और मर्यादा का है, तो जांच में पारदर्शिता की मांग करना हर नागरिक और संत का अधिकार है।

अब अखाड़ा परिषद और संत समाज के बीच का यह मतभेद अब एक नया मोड़ ले चुका है। इसके साथ ही अब यह मांग भी तेज होने लगी है कि शंकराचार्य प्रकरण की जांच गैर भाजपा शासित राज्य के निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाय। गौरतलब है कि शंकराचार्य पर मुकदमे के लिए प्रयागराज कोर्ट के आदेश के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी एक दिन पहले सवाल उठाया और योगी सरकार की कड़ी निंदा की। कहाकि अब इस स्तर पर उतर आई है योगी सरकार। शंकराचार्य को डराने के लिए 20 साल पुराना मामला लेकर चली आई है। अब इस सरकार का अंत करीब है।