वकीलों के चैंबरों पर चला बुलडोजर, पुलिस से टकराव के बीच बार काउंसिल द्वारा 600 लाठियां बांटने के दावे से मचा बवाल
खाकी Vs काला कोट: लखनऊ में हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर भड़के वकील, जिला अदालतों में कार्य बहिष्कार से न्यायिक कामकाज ठप।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिला न्यायालय परिसर और उसके आसपास वकीलों के चैंबरों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद बेहद गहरा गया है। इस प्रशासनिक एक्शन के विरोध में वकील और पुलिस-प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। हालात इस कदर तनावपूर्ण हो चुके हैं कि बार काउंसिल से जुड़े एक कथित दावे ने आग में घी का काम किया है, जिसमें विरोध स्वरूप वकीलों को 600 लाठियां बांटने की बात कही जा रही है। इस टकराव के कारण जिला अदालतों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है।
हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में अधिक कार्रवाई का आरोप
पूरे विवाद की शुरुआत इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद हुई, जिसमें प्रशासन को अवैध रूप से बने वकीलों के चैंबरों को हटाने का निर्देश दिया गया था। इस निर्देश के क्रम में जब प्रशासनिक अमला बुलडोजर लेकर पहुंचा, तो वकीलों ने इसका तीखा विरोध किया। वकील संगठनों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने केवल 72 चैंबरों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन प्रशासन ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 200 से अधिक चैंबरों को मलबे में तब्दील कर दिया। इस अतिरिक्त कार्रवाई ने वकीलों के आक्रोश को भड़का दिया।
पुलिस-वकील झड़प और '600 लाठियां' बांटने का दावा
चैंबर तोड़े जाने के विरोध के दौरान स्थिति उस समय अनियंत्रित हो गई जब वकीलों और पुलिस बल के बीच हिंसक झड़प हो गई। प्रदर्शनकारी वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने उन पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिससे कई अधिवक्ता घायल हो गए।
इस बीच, माहौल तब और गरमा गया जब सोशल मीडिया और कानूनी गलियारों में यह खबर फैली कि बार काउंसिल की ओर से वकीलों को आत्मरक्षार्थ और विरोध दर्ज कराने के लिए करीब 600 लाठियां बांटी गई हैं। हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस सूचना ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं।
अदालतों में तालाबंदी जैसे हालात, फरियादी बेहाल
इस घटना के विरोध में वकीलों ने एकजुट होकर जिला न्यायालयों में पूरी तरह से कार्य बहिष्कार (Strike) का एलान कर दिया है। वकीलों के हड़ताल पर चले जाने से अदालतों में रोजमर्रा के मामलों की सुनवाई पूरी तरह ठप पड़ गई है। दूर-दराज से आए फरियादियों और वादकारियों को बिना सुनवाई के वापस लौटना पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण मामलों की तारीखें आगे बढ़ने से न्यायिक प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे जनता में भारी असंतोष है।
प्रशासनिक पक्ष और समाधान की तलाश
जहां एक तरफ वकील संगठन इस कार्रवाई को बिना उचित प्रक्रिया और तय दायरे से बाहर बताकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि पूरी कार्रवाई माननीय हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के अनुपालन में की गई है और इसमें किसी भी तरह की दुर्भावना नहीं थी।
फिलहाल, लखनऊ की अदालतों में भारी पुलिस बल तैनात है और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। गतिरोध को खत्म करने और अदालती कामकाज को दोबारा सुचारू रूप से शुरू कराने के लिए जिला प्रशासन और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच बातचीत के रास्ते तलाशे जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है।